दिल्ली ब्लास्ट: एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया
दिल्ली के लाल किले के इलाके में हुए बम धमाके के मामले में चल रही जांच के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के कई स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया

नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किले के इलाके में हुए बम धमाके के मामले में चल रही जांच के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के कई स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया।
आतंकवाद रोधी एजेंसी ने श्रीनगर, बारामूला, जम्मू, कुलगाम, गांदरबल और हंदवाड़ा जिलों में नौ स्थानों पर तलाशी ली। तलाशी के दौरान कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए, जिन्हें फोरेंसिक विश्लेषण के लिए भेजा गया है।
10 नवंबर 2025 को राजधानी में हुए भीषण विस्फोट में कई लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। इस विस्फोट में मुख्य आरोपी उमर उन नबी भी मारा गया। जांच में पता चला कि उमर ने गिरफ्तार सह-आरोपियों और अन्य लोगों के साथ मिलकर विस्फोट की साजिश रची थी।
राष्ट्रीय एजेंसी इस आतंकी हमले के पीछे की साजिश का पर्दाफाश करने और देश में अराजकता फैलाने और अस्थिरता पैदा करने की साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
वहीं, 13 मार्च को पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए ब्लास्ट के आरोपियों—डॉ. शाहीन, मुफ्ती इरफान अहमद, जासिर बिलाल वानी, डॉ. अदील अहमद, मुजम्मिल और यासिर अहमद डार—की न्यायिक हिरासत शुक्रवार से 15 दिन बढ़ा दी। सुरक्षा को देखते हुए इन सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एनआईए कोर्ट में पेश किया गया था।
एनआईए ने कोर्ट से कहा कि अभी और सबूत जुटाने और आरोपियों से पूछताछ के लिए और समय लग सकता है। इसीलिए इनकी न्यायिक हिरासत बढ़ा दी जाए, जिससे मामले की सही से जांच की जा सके।
25 फरवरी को इस मामले में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जो एनआईए से बचने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे। आरोपियों की पहचान जम्मू-कश्मीर के गांदरबल निवासी जमीर अहमद अहंगर और श्रीनगर निवासी तुफैल अहमद भट के रूप में हुई थी।
एनआईए मामले की गहन जांच कर रही है, जिसका उद्देश्य इस कायराना आतंकी हमले के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश करना है। जांच एजेंसी के अनुसार, जमीर अहमद और तुफैल अहमद प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीएच) के सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) थे।


