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पीएफआई पर शिकंजा : एनआईए कोर्ट ने चेयरमैन ओएमए सलाम समेत 21 आरोपियों पर तय किए आरोप, 10 जुलाई को अगली सुनवाई

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चेयरमैन ओएमए सलाम, वाइस चेयरमैन ईएम अबूबकर, समेत कुल 21 आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप तय कर दिए हैं।

पीएफआई पर शिकंजा : एनआईए कोर्ट ने चेयरमैन ओएमए सलाम समेत 21 आरोपियों पर तय किए आरोप, 10 जुलाई को अगली सुनवाई
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नई दिल्ली। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चेयरमैन ओएमए सलाम, वाइस चेयरमैन ईएम अबूबकर, समेत कुल 21 आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप तय कर दिए हैं।

अदालत ने इन सभी पर आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत विभिन्न आतंकवाद संबंधी अपराधों के आरोप लगाए हैं।

एनआईए के अनुसार, आरोपियों पर आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने, आतंकवादी साजिश रचने, प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने और ऐसे अभियानों के लिए लोगों की भर्ती करने जैसे गंभीर आरोप हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी और उस दिन सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि सितंबर 2022 में एनआईए ने देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि पीएफआई के शीर्ष पदाधिकारी संगठन की गतिविधियों को संचालित करने और कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी योजनाओं को आगे बढ़ाने में शामिल थे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह गंभीर संदेह पैदा होता है कि आरोपी पीएफआई और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद (एनईसी) के माध्यम से भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त करने और 2047 तक या उससे पहले शरिया कानून के तहत इस्लामी खिलाफत स्थापित करने की कथित साजिश में शामिल थे। अदालत के अनुसार, यह उद्देश्य राज्य के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के जरिए हासिल करने की योजना का हिस्सा बताया गया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच में सामने आया 'विजन 2047' पीएफआई का ही दस्तावेज था। अदालत के अनुसार, हिंदू नेताओं को निशाना बनाने और इराक व सीरिया में सक्रिय आतंकवादी संगठन आईएसआईएस को समर्थन देने से जुड़े कथित संस्थागत निर्णय पीएफआई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठकों में लिए गए थे।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ये किसी एक व्यक्ति के निजी कार्य नहीं थे, बल्कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा संचालित और निर्देशित गतिविधियों का हिस्सा प्रतीत होते हैं। मामले की सुनवाई अब 10 जुलाई को आगे बढ़ेगी।


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