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इंडिया ब्लॉक की बैठक को कांग्रेस ने बताया एकजुटता तो भाजपा बोली बिखरता हुआ मोर्चा

दिल्ली में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस ने इसे देश और संविधान की रक्षा की लड़ाई बताया, तो वहीं भाजपा ने दावा किया कि इंडिया ब्लॉक धीरे-धीरे टूट रहा है और उसका अस्तित्व कमजोर पड़ता जा रहा है।

इंडिया ब्लॉक की बैठक को कांग्रेस ने बताया एकजुटता तो भाजपा बोली बिखरता हुआ मोर्चा
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नई दिल्ली। दिल्ली में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस ने इसे देश और संविधान की रक्षा की लड़ाई बताया, तो वहीं भाजपा ने दावा किया कि इंडिया ब्लॉक धीरे-धीरे टूट रहा है और उसका अस्तित्व कमजोर पड़ता जा रहा है।

कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य जेबी माथेर ने कहा कि जो नेता गठबंधन के समर्थन और उसकी विचारधारा के आधार पर चुनाव जीतकर आए हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि उनकी जीत किस वजह से हुई।

उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता या दल अब अपना रुख बदलता है या गठबंधन छोड़ने का फैसला करता है, तो यह उन लोगों के विश्वास के साथ धोखा होगा, जिन्होंने उन पर भरोसा जताया था। राजनीतिक लाभ के लिए दल बदलना या गठबंधन बदलना लंबे समय तक टिकने वाला नहीं होता। देश के दीर्घकालिक हितों के लिए इंडिया ब्लॉक ही सबसे मजबूत मंच है।

कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य ने यह भी बताया कि इंडिया ब्लॉक की बैठक में 23 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया। यह केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की लड़ाई है।

उन्होंने विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि यह समय आपसी छोटे-मोटे मतभेद भुलाकर एकजुट होने का है। संविधान की रक्षा और देश के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए सभी विपक्षी दलों को मिलकर काम करना चाहिए।

वहीं, भाजपा के राज्यसभा सदस्य अशोक चव्हाण ने इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधते हुए कहा कि यह गठबंधन अब धीरे-धीरे बिखर रहा है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष दिखाई दे रहा है। टीएमसी के कुछ सांसद और विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं और अलग विपक्षी समूह बनाने की कोशिश भी देखने को मिली हैं।

अशोक चव्हाण ने कहा कि डीएमके भी इंडिया ब्लॉक से दूरी बनाती हुई दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए इंडिया ब्लॉक में अब बहुत कुछ बचा नहीं है और इसका राजनीतिक प्रभाव लगातार कमजोर होता जा रहा है।


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