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59 साल बाद कांग्रेस की वापसी: तमिलनाडु कैबिनेट में शामिल

तमिलनाडु की राजनीति में गुरुवार को एक ऐतिहासिक पल दर्ज होने जा रहा है

59 साल बाद कांग्रेस की वापसी: तमिलनाडु कैबिनेट में शामिल
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टीवीके-कांग्रेस गठबंधन मजबूत: नया राजनीतिक समीकरण

  • ऐतिहासिक शपथ ग्रहण: गुरुवार को होगा मंत्रिमंडल विस्तार
  • एआईएडीएमके बागियों को झटका: कैबिनेट से बाहर रखा गया
  • वामपंथी समर्थन बरकरार: बीजेपी की बैकडोर एंट्री रोकी

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में गुरुवार को एक ऐतिहासिक पल दर्ज होने जा रहा है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस पार्टी को 59 साल बाद कैबिनेट में जगह मिलने जा रही है। पार्टी के दो विधायक- एडवोकेट राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन- मंत्री पद की शपथ लेंगे।

कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दोनों विधायकों को कैबिनेट में शामिल करने की मंजूरी दी है। वेणुगोपाल ने इसे "ऐतिहासिक अवसर" बताते हुए उम्मीद जताई कि नए मंत्री जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे और कल्याणकारी शासन की दिशा में काम करेंगे।

गठबंधन सरकार का नया स्वरूप

विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन बहुमत से पीछे रह गई। ऐसे में कांग्रेस के पाँच विधायकों का समर्थन सरकार बनाने में निर्णायक साबित हुआ। अब कैबिनेट विस्तार के जरिए कांग्रेस के साथ-साथ वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) को भी शामिल किए जाने की संभावना है। वामपंथी दल CPI और CPM बाहर से समर्थन जारी रखेंगे।

टीवीके ने पहले चर्चा में रहे एआईएडीएमके के बागी विधायकों को मंत्रिपद देने का विचार छोड़ दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री विजय चाहते हैं कि कैबिनेट में वही दल शामिल हों जिन्होंने सरकार को समर्थन दिया है।

कांग्रेस के लिए बड़ी उपलब्धि

राज्य में कांग्रेस के केवल पाँच विधायक हैं। ऐसे में 59 साल बाद कैबिनेट में शामिल होना पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। आखिरी बार कांग्रेस 1960 के दशक में तमिलनाडु सरकार का हिस्सा बनी थी। इस बार का गठबंधन राज्य की राजनीति में नया समीकरण बना रहा है, जो डीएमके और एआईएडीएमके की पारंपरिक राजनीति को चुनौती देता है।

वामपंथी दलों ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर एआईएडीएमके के बागियों को जगह दी गई तो वे समर्थन वापस ले सकते हैं। उनका कहना था कि उनका समर्थन "बीजेपी की बैकडोर एंट्री" रोकने के लिए है।

अब सबकी निगाहें गुरुवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर हैं, जहाँ यह देखा जाएगा कि नया मंत्रिमंडल कितना संतुलित और प्रभावी साबित होता है।


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