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देश में कोयले का भंडार रिकॉर्ड 210 मिलियन टन तक पहुंचा, 88 दिनों के लिए पर्याप्त: सरकार

इस साल देश में कोयले का उत्पादन और सप्लाई खपत से ज्यादा रही है, जिसके कारण खदानों और थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकार ने बुधवार को यह जानकारी दी।

देश में कोयले का भंडार रिकॉर्ड 210 मिलियन टन तक पहुंचा, 88 दिनों के लिए पर्याप्त: सरकार
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नई दिल्ली। इस साल देश में कोयले का उत्पादन और सप्लाई खपत से ज्यादा रही है, जिसके कारण खदानों और थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकार ने बुधवार को यह जानकारी दी।

कोयला मंत्रालय के अनुसार, देश में कुल कोयला भंडार लगभग 210 मिलियन टन (एमटी) हो गया है, जो मौजूदा खपत दर के हिसाब से करीब 88 दिनों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की खदानों में 1 अप्रैल 2025 को 106.78 मिलियन टन कोयला स्टॉक था, जो 9 मार्च 2026 तक बढ़कर 121.39 मिलियन टन हो गया।

इसके अलावा सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) की खदानों में करीब 6 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जबकि कैप्टिव और कमर्शियल खदानों में 15.12 मिलियन टन कोयला मौजूद है।

मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में करीब 14 मिलियन टन कोयला ट्रांजिट में है, यानी परिवहन के दौरान है। इस तरह खदानों और सप्लाई चेन में कुल कोयला भंडार रिकॉर्ड 156.58 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

इसके अलावा 9 मार्च तक थर्मल पावर प्लांट्स में 54.05 मिलियन टन कोयला मौजूद था, जो लगभग 24 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि गैर-नियंत्रित (नॉन-रेगुलेटेड) सेक्टर को कोयले की सप्लाई पिछले साल की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत बढ़ी है।

सरकार के अनुसार, देश में कोयला उत्पादन लगातार स्थिर गति से जारी है, जिससे खदानों पर स्टॉक बढ़ रहा है और साथ ही रेलवे की लॉजिस्टिक मदद से उपभोक्ताओं तक पर्याप्त सप्लाई भी सुनिश्चित की जा रही है।

कोयला मंत्रालय ने आगे कहा कि वह नीतिगत समर्थन, लगातार गहन निगरानी और हितधारकों के साथ समन्वय के जरिए एक स्थिर और बेहतर प्रदर्शन वाला वातावरण बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है।

सरकार के मुताबिक, इन प्रयासों का उद्देश्य देश में कोयले की भरोसेमंद उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों में बिना रुकावट संचालन बनाए रखना और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। साथ ही यह 'विकसित भारत 2047' के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद करेगा।


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