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दिल्‍ली में CJP का प्रदर्शन, अतुल कुलकर्णी, कुनिका सदानंद और ऋचा चड्ढा का फुल सपोर्ट

अभिनेता प्रकाश राज, अतुल कुलकर्णी, अभिनेत्री कुनिका सदानंद और ऋचा चड्ढा समेत कई लोग युवाओं के समर्थन में सामने आए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है और पहले कहा था कि यदि 5 जून तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह भी प्रदर्शन में शामिल होंगे।

दिल्‍ली में  CJP का प्रदर्शन, अतुल कुलकर्णी, कुनिका सदानंद और ऋचा चड्ढा का फुल सपोर्ट
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नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर शुक्रवार, 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, इस प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति प्राप्त की जा चुकी है। आंदोलन का नेतृत्व सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके करेंगे। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाना है। अभिजीत दीपके ने देशभर के युवाओं से अपील की है कि वे किताब और तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें।

कई कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन

इस प्रदर्शन को लेकर फिल्म जगत और सामाजिक क्षेत्र की कई हस्तियों ने समर्थन व्यक्त किया है। अभिनेता प्रकाश राज, अतुल कुलकर्णी, अभिनेत्री कुनिका सदानंद और ऋचा चड्ढा समेत कई लोग युवाओं के समर्थन में सामने आए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है और पहले कहा था कि यदि 5 जून तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह भी प्रदर्शन में शामिल होंगे।

कैसे पड़ा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम?

सीजेपी का नाम एक टिप्पणी के बाद चर्चा में आया था, जिसके बाद अभिजीत दीपके ने इस नाम के साथ युवाओं का एक मंच तैयार किया। समर्थकों का कहना है कि ‘कॉकरोच’ प्रतीक के रूप में संघर्ष और अस्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है।

ऋचा चड्ढा ने विदेश से भेजा संदेश

अभिनेत्री ऋचा चड्ढा इस समय न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में हैं, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक लंबा संदेश साझा कर युवाओं को शुभकामनाएं दी हैं। ऋचा ने लिखा कि उनके मन में दिल्ली बसी हुई है, जहां उनका बचपन, स्कूल और कॉलेज की यादें जुड़ी हुई हैं। उन्होंने युवाओं से शांतिपूर्ण और रणनीतिक तरीके से अपनी बात रखने का आग्रह करते हुए लिखा कि उन्हें दिखावटी राष्ट्रवाद के बजाय सच्चे देशभक्ति के मूल्यों को अपनाना चाहिए। अपने संदेश में उन्होंने डायनासोर और कॉकरोच का प्रतीकात्मक उल्लेख करते हुए कहा कि समय और परिस्थितियों के बावजूद कुछ चीजें लंबे समय तक बनी रहती हैं। ऋचा ने फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ का एक पुराना दृश्य भी साझा किया, जिसमें अनिल कपूर और श्रीदेवी कॉकरोच देखकर घबरा जाते हैं।

अतुल कुलकर्णी ने युवाओं से जताई उम्मीद

अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने भी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने लिखा कि देश के युवाओं से उन्हें काफी उम्मीदें हैं और उनकी पीढ़ी सहित कई पीढ़ियां अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाने में सफल नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि पुरानी पीढ़ियों की गलतियों का बोझ अब युवाओं को विरासत में मिला है और इसके लिए वह व्यक्तिगत रूप से क्षमा मांगते हैं। अतुल ने उम्मीद जताई कि नई पीढ़ी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ देश को बेहतर दिशा देगी।

कुनिका सदानंद ने लोकतंत्र और जवाबदेही पर रखी बात

अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने भी एक्स पर कई पोस्ट साझा करते हुए लोकतंत्र में जागरूक नागरिकों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र किसी एक पार्टी, विचारधारा या व्यक्ति का नहीं होता, बल्कि उन नागरिकों का होता है जो सवाल पूछने और तथ्यों को समझने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र अंध समर्थन से नहीं, बल्कि जवाबदेही, भागीदारी और जागरूकता से मजबूत होता है। एक वीडियो संदेश में कुनिका ने कहा कि जब लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती, तब वे नए तरीकों से अपनी बात समाज और व्यवस्था तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं का बड़ी संख्या में सामने आना इस बात का संकेत है कि समाज में बदलाव और संवाद की जरूरत महसूस की जा रही है।

प्रकाश राज और सोनम वांगचुक भी समर्थन में

अभिनेता प्रकाश राज पहले ही इस आंदोलन का समर्थन कर चुके हैं। वहीं, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय सोनम वांगचुक ने भी प्रदर्शन के पक्ष में अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वह आंदोलन में शामिल होंगे।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर टिकी निगाहें

जंतर-मंतर पर होने वाले इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में काफी चर्चा है। आयोजकों का कहना है कि यह पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण कार्यक्रम होगा, जबकि समर्थक इसे युवाओं की आवाज और जवाबदेही की मांग के रूप में देख रहे हैं।


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