CJP आंदोलन के बीच सरकार की दूसरी बातचीत की पहल, जंतर-मंतर पर बैठक की मांग
सौरव दास के अनुसार, बुधवार सुबह दिल्ली पुलिस ने उन्हें सूचना दी कि जेपी नड्डा उनसे मुलाकात करना चाहते हैं और उन्हें उनके सरकारी आवास पर बुलाया गया है। लेकिन CJP ने स्पष्ट किया कि वह किसी मंत्री के घर या कार्यालय में बातचीत के लिए नहीं जाएगा।

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने एक बार फिर बातचीत की पहल की है। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने पुष्टि की कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता जेपी नड्डा की ओर से उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था। हालांकि, संगठन ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और कहा कि वार्ता किसी मंत्री के आवास पर नहीं बल्कि जंतर-मंतर या उसके आसपास किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए। इस बीच, संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग थानों में 10 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। इन मामलों में प्रदर्शनकारियों पर पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सुरक्षा बलों पर हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
CJP ने मंत्री आवास पर जाने से किया इनकार
सौरव दास के अनुसार, बुधवार सुबह दिल्ली पुलिस ने उन्हें सूचना दी कि जेपी नड्डा उनसे मुलाकात करना चाहते हैं और उन्हें उनके सरकारी आवास पर बुलाया गया है। लेकिन CJP ने स्पष्ट किया कि वह किसी मंत्री के घर या कार्यालय में बातचीत के लिए नहीं जाएगा। संगठन का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में आंदोलन की मांगों पर गंभीर चर्चा करना चाहती है, तो उसे जंतर-मंतर या उसके आसपास किसी निष्पक्ष स्थान पर प्रतिनिधियों से मिलना चाहिए। CJP का यह भी कहना है कि वार्ता केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर ठोस समाधान की दिशा में होनी चाहिए।
सरकार की मंशा पर स्पष्टता की मांग
CJP नेतृत्व का कहना है कि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए तैयार है या नहीं। संगठन का दावा है कि हजारों लोग अब भी जंतर-मंतर पर आंदोलन में शामिल हैं, इसलिए किसी भी बातचीत का उद्देश्य केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि परिणामकारी होना चाहिए।
अमित शाह के आवास पर उच्चस्तरीय बैठक
CJP आंदोलन के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और नितिन नवीन सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। हालांकि, बैठक में क्या निर्णय लिए गए, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।राजनीतिक हलकों में इस बैठक को आंदोलन से जुड़े हालात और आगे की रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सोनम वांगचुक से मेदांता अस्पताल में मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मंगलवार देर रात गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था।
संसद मार्च हिंसा मामले में 10 FIR दर्ज
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में अलग-अलग थानों में कुल 10 FIR दर्ज की हैं। पुलिस के अनुसार, इन मामलों में प्रदर्शनकारियों पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों पर हमले, पथराव, बैरिकेड तोड़ने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और ड्यूटी में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि घटनाओं के वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। वहीं, प्रदर्शनकारी पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।
प्रदर्शनकारियों ने बदला रुख
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने पहले सरकार से बातचीत की मांग की थी, जिसके बाद उन्हें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने का अवसर तुरंत उपलब्ध कराया गया। उनका आरोप है कि बातचीत के दौरान प्रदर्शन न करने का भरोसा दिया गया, लेकिन बाद में आंदोलन जारी रखा गया और सरकार के खिलाफ भ्रामक नैरेटिव तथा फर्जी खबरें फैलाने की कोशिश की गई।
CJP की समर्थकों से अपील—फिलहाल भोजन न भेजें
जंतर-मंतर से जारी एक अपडेट में CJP ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे फिलहाल भोजन की अतिरिक्त व्यवस्था न भेजें। संगठन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के पास बुधवार के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध है और अधिक खाद्य सामग्री भेजने से अनावश्यक बर्बादी हो सकती है। संगठन ने आंदोलन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर आगे की आवश्यकताओं की जानकारी समय-समय पर साझा की जाएगी।
बातचीत और कानून-व्यवस्था पर टिकी नजर
एक ओर सरकार बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश करती दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कार्रवाई भी जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्ष वार्ता के लिए किसी साझा मंच पर सहमत होते हैं या आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई समानांतर रूप से आगे बढ़ती है।


