CJP Protest: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी, अभिजीत दीपके ने कहा- देश के युवा अब नहीं डरेंगे
अभिजीत दिपके ने उस सुबह इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपने पहुंचने को याद करते हुए कहा कि उनकी फ्लाइट लैंड होने से ठीक पहले, उन्हें ऐसा लगा जैसे वह अपनी आज़ादी के आखिरी पल जी रहे हैं।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के छात्र, युवा पेशेवर और समर्थक यहां पहुंचे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नीट पेपर लीक, सीबीएसई मूल्यांकन विवाद और अन्य परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है, जिसके चलते जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके अमेरिका के बोस्टन से शनिवार सुबह नई दिल्ली पहुंचे। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सैकड़ों युवाओं ने उनका स्वागत किया। अभिजीत दिपके 'जय भीम' के नारों के बीच जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। दिपके भारी सुरक्षा के बीच जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और भाषण भी दिया। इस दौरान गर्मी ज्यादा होने की वजह से अभिजीत दीपके की तबीयत अचानक ही बिगड़ गई। उन्हें तुरंत ही मंच से पीछे ले जाया गया। लेकिन भीड़ ज्यादा होने पर पास ही गाड़ी में बिठाया गया।
अभिजीत दीपके ने आंदोलन को बताया लंबी लड़ाई
अभिजीत दिपके ने उस सुबह इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपने पहुंचने को याद करते हुए कहा कि उनकी फ्लाइट लैंड होने से ठीक पहले, उन्हें ऐसा लगा जैसे वह अपनी आज़ादी के आखिरी पल जी रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं इस मकसद के लिए अपनी आजादी कुर्बान करने के लिए पूरी तरह तैयार था। CJP के फाउंडर ने दावा किया कि जेल जाने के डर से कई लोगों ने खुद से समझौता कर लिया है और ‘बिक गए’ हैं। भीड़ की ज़ोरदार तालियों के बीच उन्होंने कहा, लेकिन इस देश का छात्र, युवा नहीं बिका है। देश के युवा अब नहीं डरेंगे। ”
अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर से समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी एक परीक्षा या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है, लेकिन सरकार कार्रवाई करने के बजाय सोशल मीडिया अकाउंट हैक करने और पोस्ट हटाने जैसे कदमों में लगी हुई है।
दीपके ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट हटाई जा सकती हैं, लेकिन आंदोलन की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी है और छात्र-युवा पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके अनुसार, देश का युवा बिकाऊ नहीं है और वह इस आंदोलन के लिए अपनी आजादी तक कुर्बान करने के लिए तैयार थे।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील
अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाए रखने की अपील की। उन्होंने समर्थकों से कहा कि वे प्रदर्शन स्थल पर किताब और तिरंगा लेकर आएं, ताकि आंदोलन का संदेश सकारात्मक तरीके से सामने आए। साथ ही उन्होंने पुलिसकर्मियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए उन्हें फूल भेंट करने की भी अपील की। सीजेपी नेतृत्व का कहना है कि उनका आंदोलन लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप चल रहा है और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता से उसका कोई संबंध नहीं है।
आंदोलन को भड़काने की कोशिश का आरोप
प्रदर्शन के बीच सीजेपी से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन का माहौल खराब करने और प्रदर्शन को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। संगठन की ओर से प्रशासन से ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गई है। सीजेपी समर्थकों ने प्रदर्शन में शामिल लोगों से भी अपील की कि वे किसी भी उकसावे में न आएं और संयम बनाए रखें। दूसरी ओर, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
सोनम वांगचुक का समर्थन, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय सोनम वांगचुक भी जंतर-मंतर पहुंचे और प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। वह लाल गुलाब लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। उनके पहुंचते ही युवाओं का जोश और हाई हो गया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल नीट परीक्षा या सीबीएसई तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर विषय है।
वांगचुक ने कहा कि वह पिछले लगभग 40 वर्षों से दूरदराज के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी अपेक्षित बदलाव नहीं दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से छात्रों और अभिभावकों में निराशा बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अभिजीत दीपके को गिरफ्तार किया जाता है तो वह विरोधस्वरूप छह सप्ताह का उपवास करेंगे। वांगचुक के इस बयान के बाद आंदोलन को और अधिक समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है।


