Top
Begin typing your search above and press return to search.

रुचिका के बचाव में CJP प्रवक्ता बोले, अपशब्दों का इस्तेमाल देश में कब से अपराध, लोग रोजाना ऐसी भाषा का करते हैं इस्तेमाल

सौरव दास ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक मंच पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता और इसकी आलोचना की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल अपशब्दों के प्रयोग को आपराधिक कार्रवाई का आधार बनाया जाना चाहिए।

रुचिका के बचाव में CJP प्रवक्ता बोले, अपशब्दों का इस्तेमाल देश में कब से अपराध, लोग रोजाना ऐसी भाषा का करते हैं इस्तेमाल
X

नई दिल्ली/नोएडा: जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में दर्ज जीरो एफआईआर को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आपत्तिजनक भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन ऐसी घटनाओं में आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल कर युवाओं को निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि अभिव्यक्ति और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखा जाए तथा पुलिस कार्रवाई का इस्तेमाल किसी को अनावश्यक रूप से परेशान करने के लिए न हो।

'अपशब्दों की निंदा, लेकिन FIR पर आपत्ति'

सौरव दास ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक मंच पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता और इसकी आलोचना की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल अपशब्दों के प्रयोग को आपराधिक कार्रवाई का आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध के दौरान कही गई बातों का मूल्यांकन कानून के दायरे में होना चाहिए, लेकिन हर विवादास्पद टिप्पणी पर कठोर आपराधिक कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।

संसद सदस्यों के मामलों का भी किया जिक्र

सीजेपी प्रवक्ता ने अपने बयान में यह भी कहा कि कई जनप्रतिनिधियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं, फिर भी उनके मामलों में कार्रवाई की गति पर अक्सर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चयनात्मक कार्रवाई की धारणा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों के भरोसे को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष मामले या न्यायिक प्रक्रिया का विस्तृत उल्लेख नहीं किया।

सरकार से युवाओं को परेशान न करने की अपील

सौरव दास ने कहा कि सरकार और पुलिस प्रशासन को युवाओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि संबंधित युवती के मामले में निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए तथा अनावश्यक दबाव या उत्पीड़न से बचा जाए। उनका कहना था कि कानून का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि भय का वातावरण बनाना।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना पुलिस ने एक युवती के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की है। चूंकि कथित घटना दिल्ली में हुई थी, इसलिए वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मामला आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है।

अधिवक्ता की शिकायत पर हुई कार्रवाई

एफआईआर गाजियाबाद निवासी अधिवक्ता स्मृति सिंह की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान आरोपी युवती ने सार्वजनिक मंच से प्रधानमंत्री के लिए कथित रूप से अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसी टिप्पणी से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा प्रभावित होती है और इससे सामाजिक सौहार्द पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

वायरल वीडियो बना जांच का आधार

बताया गया कि प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिकायतकर्ता ने संबंधित युवती की पहचान की और पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस ने उपलब्ध शिकायत और प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी युवती मूल रूप से हरियाणा के फरीदाबाद की रहने वाली है और वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-168 स्थित एक आवासीय सोसायटी में फ्लैट की मालिक है। जांच के दौरान पुलिस जब उसके पते पर पहुंची तो फ्लैट बंद मिला।

अब दिल्ली पुलिस करेगी आगे की जांच

नोएडा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के तहत जीरो एफआईआर दर्ज कर मामले को दिल्ली पुलिस को भेज दिया है। अब आगे की जांच, वायरल वीडियो की सत्यता, कथित बयान की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच दिल्ली पुलिस करेगी। फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग तर्क सामने आए हैं। एक ओर शिकायतकर्ता संवैधानिक पद की गरिमा का हवाला देते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं सीजेपी पुलिस कार्रवाई को असंतुलित बताते हुए निष्पक्ष और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील कर रही है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it