संसद मार्च के बाद अभिजीत दीपके ने सरकार पर लगाए आरोप, कहा- नड्डा के घर किया गया नजरबंद
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की ओर से बातचीत के लिए CJP के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया गया था। उनके अनुसार, संगठन को उम्मीद थी कि सरकार आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत करेगी, लेकिन घटनाक्रम अलग दिशा में चला गया।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने दावा किया कि सरकार ने बातचीत के नाम पर उनके प्रतिनिधियों को रोके रखा और इसके बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों व समर्थकों पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
'बातचीत के लिए बुलाकर प्रतिनिधियों को रोका गया'
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की ओर से बातचीत के लिए CJP के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया गया था। उनके अनुसार, संगठन को उम्मीद थी कि सरकार आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत करेगी, लेकिन घटनाक्रम अलग दिशा में चला गया। दीपके ने दावा किया कि संगठन के प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरभ दास को मुलाकात के दौरान बाहर नहीं आने दिया गया और उनसे कुछ समय तक संपर्क भी नहीं हो सका। उनका कहना है कि इस दौरान संगठन के अन्य सदस्य अपने प्रतिनिधियों से लगातार संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
CJP संस्थापक ने संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि यदि प्रशासन प्रदर्शन को रोकना चाहता था तो कम बल प्रयोग वाले विकल्प भी अपनाए जा सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल किया गया। दीपके ने कहा कि आंदोलन में शामिल अधिकांश छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे थे और उनके साथ कठोर व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय करने की मांग की।
महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस के कुछ पुरुष कर्मियों पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान महिला प्रतिभागियों के साथ मारपीट की गई और उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ। इन आरोपों को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी फिलहाल नहीं हुई है।
छात्र आंदोलन जारी रखने का ऐलान
CJP नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन आगे भी छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा और जल्द ही अगले कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है और संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
सोनम वांगचुक के अनशन का किया जिक्र
प्रेस वार्ता के दौरान दीपके ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि हालिया घटनाओं से आहत होकर वांगचुक ने अपना प्रस्तावित अनशन समाप्त न करने का फैसला लिया है। दीपके के अनुसार, उन्हें वांगचुक की ओर से संदेश मिला है कि छात्रों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई को देखते हुए वे अपना अनशन जारी रखेंगे। इस संबंध में वांगचुक की ओर से अलग से आधिकारिक बयान सामने आने की प्रतीक्षा है।
मुलाकात के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
यह पूरा विवाद उस मुलाकात के बाद सामने आया जिसमें CJP के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की थी। मुलाकात के अगले ही दिन संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। जहां CJP और विपक्षी दल पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार और भाजपा के कई नेताओं का कहना है कि संसद क्षेत्र की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और मामले को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।


