जंतर-मंतर पर CJP प्रमुख अभिजीत दिपके की शांति की अपील, हिंसा पर बोले- ‘पथराव करने वाले छात्र नहीं, बाहरी लोग’
अभिजीत दिपके ने कहा कि पिछले एक महीने से चल रहा यह आंदोलन इसलिए टिक पाया है क्योंकि इसकी बुनियाद शांति और अहिंसा पर रखी गई है। उन्होंने कहा कि आंदोलन आगे भी इसी मार्ग पर चलेगा।

नई दिल्ली: CJP Protest: जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत अहिंसा और सत्याग्रह है तथा किसी भी उकसावे में आने से बचना चाहिए। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए दिपके ने कहा कि आंदोलनकारी संयम बनाए रखें, क्योंकि कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। उनके अनुसार, यदि कोई उकसाने का प्रयास करे तो भी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखना चाहिए।
‘अहिंसा ही आंदोलन की नींव है’
अभिजीत दिपके ने कहा कि पिछले एक महीने से चल रहा यह आंदोलन इसलिए टिक पाया है क्योंकि इसकी बुनियाद शांति और अहिंसा पर रखी गई है। उन्होंने कहा कि आंदोलन आगे भी इसी मार्ग पर चलेगा। अपने संबोधन में उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का भी उल्लेख करते हुए कहा कि देश में आज भी शांतिपूर्ण विरोध की परंपरा जीवित है और आंदोलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
हिंसा पर दी सफाई, बाहरी लोगों पर लगाया आरोप
हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर हुई झड़पों और पथराव की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए दिपके ने कहा कि हिंसा करने वाले लोग छात्र नहीं हैं। उनका आरोप है कि कुछ बाहरी तत्व आंदोलन में घुसकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस ने हिंसा के मामलों की जांच शुरू कर दी है।
प्रदर्शन जारी रहेगा
इधर, गुरुवार सुबह ही पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जारी रहेगा। रंका ने कहा कि हम सरकार से बातचीत करने के लिए तैयार थे, लेकिन सरकार ने समय बर्बाद किया। अब उन्हें बात करनी है, तो जंतर-मंतर आना होगा।
देश के कई राज्यों से पहुंच रहे हैं प्रदर्शनकारी
जंतर-मंतर पर आंदोलन में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से लोग लगातार दिल्ली पहुंच रहे हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा सहित कई राज्यों से छात्र, युवा और अन्य समर्थक प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की मौजूदगी देखी जा रही है। आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक समर्थन मिल रहा है।
दिन में दो बार हुई पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प
बुधवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दो अलग-अलग समय पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई। पुलिस के अनुसार, दोपहर करीब 4:30 बजे कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव और पानी की बोतलें फेंकीं। इस घटना में पंजाबी बाग के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) जयप्रकाश घायल हो गए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीमित बल प्रयोग किया और भीड़ को पीछे हटाया।
रात में फिर हुआ टकराव
पुलिस के अनुसार, रात करीब 8:30 बजे एनडीएमसी चौराहा और टॉलस्टॉय मार्ग के पास एक बार फिर पथराव की घटना हुई। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों पर सीधे हमला किए जाने का भी आरोप है। हालात बिगड़ने पर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। अधिकारियों का कहना है कि लगभग दस मिनट के भीतर स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया।
कई पुलिसकर्मी घायल
दिल्ली पुलिस के अनुसार, दोनों घटनाओं में कई पुलिसकर्मी घायल हुए। घायलों में कनॉट प्लेस थाने के ACP विवेक भगत सहित तीन पुलिसकर्मी शामिल हैं। उन्हें उपचार के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों का दावा है कि पुलिस कार्रवाई में उनके कई समर्थक भी घायल हुए। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
संसद मार्च के बाद से बढ़ा तनाव
इससे पहले सोमवार को आयोजित संसद मार्च के दौरान भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच व्यापक झड़प हुई थी। उस दौरान दोनों पक्षों के कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद से राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था लगातार कड़ी की जा रही है और पुलिस संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए हुए है।
सुरक्षा के मद्देनजर बढ़ाई गई केंद्रीय बलों की तैनाती
सूत्रों के अनुसार, राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए गृह मंत्रालय ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संभावित हिंसक घटनाओं को रोकना बताया जा रहा है। इस बीच, छात्र संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर जारी रहेगा, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की किसी भी घटना पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।


