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Cheque Bounce Case: राजपाल यादव को नहीं मिली जमानत, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- अब तक दो दर्जन से अधिक मौके दिए

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि राजपाल यादव को अब तक दो दर्जन से अधिक मौके दिए जा चुके हैं, लेकिन उन्होंने अपने वादों को पूरा नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप जेल इसलिए गए हैं क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया।”

Cheque Bounce Case: राजपाल यादव को नहीं मिली जमानत, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- अब तक दो दर्जन से अधिक मौके दिए
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नई दिल्ली: चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव की जमानत याचिका पर गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 16 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। कोर्ट ने शिकायतकर्ता पक्ष को भी जमानत याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राजपाल यादव की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों और लंबित भुगतान को लेकर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि उन्हें पहले ही कई अवसर दिए जा चुके हैं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि राजपाल यादव को अब तक दो दर्जन से अधिक मौके दिए जा चुके हैं, लेकिन उन्होंने अपने वादों को पूरा नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप जेल इसलिए गए हैं क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया।” बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने यह भी कहा कि भले ही उसे व्यक्तिगत स्तर पर सहानुभूति हो सकती है, लेकिन कानून सर्वोपरि है। कोर्ट ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि राजपाल यादव ने पहले अदालत के आदेश के बावजूद आत्मसमर्पण नहीं किया और दोबारा आदेश जारी होने के बाद ही आत्मसमर्पण किया।

शिकायतकर्ता को जवाब दाखिल करने का निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत ने दूसरे पक्ष, यानी शिकायतकर्ता को जमानत याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि फाइल की समीक्षा के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिनकी पहले जानकारी नहीं थी। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि पहले पारित आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने कहा कि इन सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार 16 फरवरी को अगली सुनवाई में किया जाएगा।

लंबित भुगतान और बार-बार स्थगन पर चिंता

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने राजपाल यादव के उस आश्वासन पर चिंता व्यक्त की जिसमें उन्होंने 3 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि चुकाने की बात कही थी। न्यायालय ने कहा कि मामला काफी समय से लंबित है और पुनरीक्षण सुनवाई तथा मध्यस्थता की कार्यवाही के दौरान कई बार भुगतान का वादा किया गया, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ। अदालत ने यह भी नोट किया कि लगभग 25 से 30 बार सुनवाई स्थगित करवाई गई, जिससे मामले के निस्तारण में देरी हुई। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं होने दिया जा सकता।

मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से जमानत का विरोध

शिकायतकर्ता कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से पेश वकील ने जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि बचाव पक्ष पिछली सुनवाई के दौरान भ्रम या गलत सूचना का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि उस समय भी राजपाल यादव का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता भास्कर उपाध्याय कर रहे थे। वकील ने कहा कि यदि अदालत के समक्ष पहले ही सभी तथ्यों को स्पष्ट रूप से रखा गया था, तो अब भ्रम या गलतफहमी का तर्क स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

परिवार में शादी का हवाला, अंतरिम जमानत की मांग

राजपाल यादव की ओर से उनके वकील ने अंतरिम जमानत की मांग करते हुए कहा कि अभिनेता अपने बड़े भाई की बेटी की शादी में शामिल होना चाहते हैं। वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि राजपाल यादव बकाया राशि जमा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें फिल्म उद्योग के कुछ सदस्यों और अन्य परिचितों से आर्थिक सहायता मिली है, जिससे वे भुगतान करने में सक्षम होंगे। हालांकि, अदालत ने इस पर तत्काल कोई राहत नहीं दी और मामले की अगली सुनवाई तय कर दी।

विस्तृत सुनवाई होगी

अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी, जहां अदालत शिकायतकर्ता के जवाब और दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तृत सुनवाई करेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अदालत अंतरिम जमानत पर कोई राहत देती है या पहले बकाया भुगतान की शर्तों पर सख्ती बरकरार रखती है। चेक बाउंस मामलों में अदालतें आमतौर पर भुगतान और समझौते को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद पालन न होने की स्थिति में सख्त रुख भी अपनाया जाता है। फिलहाल राजपाल यादव को जमानत पर कोई राहत नहीं मिली है और मामला 16 फरवरी तक टल गया है। अदालत का अंतिम निर्णय इस केस की दिशा तय करेगा और यह भी स्पष्ट करेगा कि क्या अभिनेता को अंतरिम राहत मिलती है या उन्हें पहले अपने वित्तीय दायित्व पूरे करने होंगे।


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