सीबीआई का बड़ा एक्शन: रिश्वतखोरी में रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट व दो इंस्पेक्टर पर एफआईआर
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रिश्वतखोरी के एक गंभीर मामले में एक रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट और दो इंस्पेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है

कस्टम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का शिकंजा, 35 लाख की रिश्वत का आरोप
- मिजोरम तस्करी केस: गोदाम से 1.42 करोड़ का सामान गायब
- ईटानगर से पटना तक सीबीआई की छापेमारी, भ्रष्टाचार नेटवर्क की पड़ताल
- सीमा सुरक्षा पर सवाल: तस्करी रोकने वाले ही बने रिश्वतखोर
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रिश्वतखोरी के एक गंभीर मामले में एक रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट और दो इंस्पेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला 3 फरवरी को गुवाहाटी के एडिशनल कमिश्नर, सीजीएसटी की शिकायत पर दर्ज किया गया।
आरोप है कि ये अधिकारी मिजोरम के चम्फाई में कस्टम प्रिवेंटिव फोर्स (सीपीएफ) में तैनात रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर रहे थे। 2022-2023 के दौरान उन्होंने बिना किसी दस्तावेज या कानूनी प्रक्रिया के सुपारी, सिगरेट जैसे तस्करी का सामान जब्त किया और संबंधित लोगों से अवैध रिश्वत मांगी। अलग-अलग मामलों में कुल 35 लाख रुपए से ज्यादा की रिश्वत लेने के बाद जब्त सामान छोड़ दिया गया।
इसके अलावा, जांच में पता चला कि 23 दिसंबर 2022 से 26 अप्रैल 2023 के बीच जब्त किए गए सामान के गोदामों से 1.42 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य का सामान गायब पाया गया। आरोपियों ने तस्करी के सामान को छोड़ने के बदले रिश्वत ली और गोदाम से सामान चोरी करने में भी शामिल थे।
सीबीआई ने आरोपी अधिकारियों के ठिकानों पर तलाशी शुरू कर दी है। ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश), गुवाहाटी (असम), सीकर (राजस्थान), पटना (बिहार) और चुराचांदपुर (मणिपुर) में उनके घरों और अन्य जगहों पर छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसी मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि रिश्वत के पूरे नेटवर्क और शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
यह मामला सीमा क्षेत्र में तस्करी और कस्टम विभाग में भ्रष्टाचार की समस्या को उजागर करता है। मिजोरम जैसे संवेदनशील इलाके में तस्करी रोकने के लिए तैनात अधिकारियों पर ही ऐसे आरोप लगना चिंता का विषय है। सीबीआई ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रष्टाचार की जानकारी तुरंत दें। जांच पूरी होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


