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बंगाल एसआईआर विवाद: सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी होंगी व्यक्तिगत रूप से पेश

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी उच्चतम न्यायालय के कोर्ट रूम नंबर 1 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होंगी

बंगाल एसआईआर विवाद: सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी होंगी व्यक्तिगत रूप से पेश
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मुख्यमंत्री की कोर्टरूम एंट्री, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच करेगी सुनवाई

  • ममता का आरोप—‘एसआईआर से लाखों वोटरों का अधिकार छीना जा रहा है’
  • टीएमसी नेताओं की याचिकाएं भी सूचीबद्ध, चुनाव आयोग पर निशाना
  • सीईसी से वॉकआउट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में ममता की सीधी बहस

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बुधवार को उच्चतम न्यायालय के कोर्ट रूम नंबर 1 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होंगी। यह पेशी पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका के संबंध में होगी।

सुश्री बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति मांगने के लिए एक आवेदन दायर किया है। चूंकि उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है इसलिए उनकी उपस्थिति के लिए सुरक्षा मंजूरी मांगी गई है।

मुख्यमंत्री के पास कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी विधि महाविद्यालय से कानून की डिग्री है और उन्होंने संक्षिप्त रूप से वकील के रूप में काम किया है। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि उनका अंतिम बार कानूनी प्रैक्टिस 2003 में की थी।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से मतदाताओं को बड़े पैमाने पर बाहर किए जाने के आरोपों और एसआईआर प्रक्रिया की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह को आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। ये याचिकाएं राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित हैं।

सुश्री बनर्जी एसआईआर प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रही हैं और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के उन परिवारों के साथ नयी दिल्ली में हैं जो इस प्रक्रिया से प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं।

यह मामला सुश्री बनर्जी की अनुच्छेद 32 याचिका से जुड़ा है जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा संचालित एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी है। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया से लोगों को अत्यधिक असुविधा हुई है और याचिका में इसके कार्यान्वयन से संबंधित प्रक्रियात्मक एवं कानूनी चिंताओं को उठाया है।

तृणमूल कांग्रेस के सांसदों डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन द्वारा दायर एक याचिका भी मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, साथ ही सुश्री बनर्जी द्वारा स्वयं दायर एक अन्य याचिका भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ शीर्ष अदालत में एक मामला भी दायर किया है।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और चुनाव आयोग के बीच विवाद सोमवार को उस समय और बढ़ गया जब उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ बैठक से यह आरोप लगाते हुए बाहर वॉकआउट कर दिया कि उन्होंने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है।

सुश्री बनर्जी के साथ-साथ तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी भी बैठक में मौजूद थे, साथ ही एसआईआर प्रक्रिया से कथित रूप से प्रभावित परिवारों के 12 सदस्य भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि मानवीय हितों की अनदेखी करते हुए तथआ कानूनों एवं नियमों का उल्लंघन करते हुए एसआईआर लागू किया गया है। सूत्रों के अनुसार, वह बुधवार को होने वाली सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय के समक्ष इस मामले पर बहस करेंगी।


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