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विधानसभा चुनाव 2026: असम, केरल और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान, शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न

असम, केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के पहले चरण में भारी मतदान दर्ज किया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान ज्यादातर शांतिपूर्ण रहा और केवल छिटपुट घटनाएं ही सामने आईं

विधानसभा चुनाव 2026: असम, केरल और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान, शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न
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नई दिल्ली। असम, केरल और पुडुचेरी में गुरुवार को हुए विधानसभा चुनाव के पहले चरण में भारी मतदान दर्ज किया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान ज्यादातर शांतिपूर्ण रहा और केवल छिटपुट घटनाएं ही सामने आईं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पुडुचेरी में सबसे ज्यादा 89.08 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि असम में 85.04 प्रतिशत और केरल में 77.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। हालांकि निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम आंकड़े जारी किए जाने बाकी हैं।

इस बार का मतदान 2021 के मुकाबले ज्यादा रहा है, जब पुडुचेरी में 83.42%, असम में 82.42% और केरल में करीब 76% मतदान हुआ था।

दिन की शुरुआत में मतदान की रफ्तार मध्यम रही, लेकिन समय के साथ बढ़ती गई। कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं। दिव्यांग मतदाताओं ने भी उत्साह के साथ मतदान में हिस्सा लिया।

केरल के एर्नाकुलम जिले के कलामास्सेरी में एक नवविवाहित जोड़ा शादी के तुरंत बाद मतदान करने पहुंचा, जो चर्चा का विषय बना। वहीं पुडुचेरी के राजभवन क्षेत्र के वीओसी गवर्नमेंट स्कूल में एक रोबोट मतदाताओं का स्वागत करता नजर आया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

इस चरण में केरल की 140 सीटों, असम की 126 सीटों और पुडुचेरी की 30 सीटों पर मतदान हुआ। इसके अलावा कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की कुछ सीटों पर उपचुनाव भी कराए गए।

मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक चला। जो मतदाता समय से पहले कतार में लग गए थे, उन्हें मतदान करने की अनुमति दी गई।

निर्वाचन आयोग और राज्य सरकारों ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे, जिनमें अर्धसैनिक बलों और पुलिस की तैनाती शामिल रही। संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई, ताकि बूथ कैप्चरिंग, डराने-धमकाने और अवैध प्रचार को रोका जा सके।

असम में ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में भारी मतदान देखने को मिला, वहीं केरल में अनुशासित और शांतिपूर्ण मतदान हुआ। पुडुचेरी में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मतदाताओं की अच्छी भागीदारी रही।

राजनीतिक रूप से असम में क्षेत्रीय पहचान, केरल में विकास बनाम सत्ता विरोधी लहर और पुडुचेरी में स्थानीय मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहे।

अब सभी की नजर 4 मई को होने वाली मतगणना पर है।


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