2020 दिल्ली दंगा: IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी, 6 बरी
यह मामला 25 फरवरी 2020 का है, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनआरसी को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। चांद बाग, खजूरी खास और आसपास के क्षेत्रों में आगजनी, पथराव और हिंसक झड़पों का दौर चल रहा था।

नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया, जबकि सबूतों के अभाव में छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं, जिनमें हत्या (धारा 302), दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, के तहत दोषी माना है। सजा पर सुनवाई अलग से होगी।
2020 के दंगों के दौरान हुई थी अंकित शर्मा की हत्या
यह मामला 25 फरवरी 2020 का है, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनआरसी को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। चांद बाग, खजूरी खास और आसपास के क्षेत्रों में आगजनी, पथराव और हिंसक झड़पों का दौर चल रहा था। इसी दौरान 26 वर्षीय अंकित शर्मा, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो में कार्यरत थे, कार्यालय से घर लौटने के बाद किसी काम से बाहर निकले थे। इसके बाद वह वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव चांद बाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ।
पोस्टमार्टम और जांच बनी मामले का अहम आधार
अंकित शर्मा के शव की बरामदगी के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर अनेक गंभीर चोटों के निशान मिलने की बात सामने आई। जांच एजेंसियों ने घटनास्थल, फोरेंसिक साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच के बाद आरोप लगाया कि हिंसक भीड़ ने अंकित शर्मा पर हमला किया और उनकी हत्या के बाद शव को नाले में फेंक दिया गया। जांच के दौरान ताहिर हुसैन के मकान और आसपास के क्षेत्र से बरामद सामग्री को भी चार्जशीट का हिस्सा बनाया गया।
ताहिर हुसैन समेत 11 लोगों के खिलाफ चला मुकदमा
पुलिस ने इस मामले में ताहिर हुसैन सहित कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया था। मार्च 2023 में अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और अन्य संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध करते हुए अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए फैसला सुनाया, जबकि छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
परिवार को छह साल बाद मिला न्याय
फैसले के बाद अंकित शर्मा के परिवार के लिए यह छह वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अंकित के पिता रविंदर कुमार, जो दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त हैं, शुरू से ही मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने की मांग करते रहे थे। परिवार का कहना था कि अंकित की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि दंगों के दौरान हुई हिंसा का गंभीर उदाहरण थी। अदालत के फैसले के बाद परिवार ने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताया।
दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। अंकित शर्मा हत्याकांड उन मामलों में शामिल रहा, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा बटोरी। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने की थी और अदालत में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की गई थी। अब दोषसिद्धि के बाद अगला चरण दोषियों की सजा तय करने का होगा, जिस पर अदालत अलग से सुनवाई करेगी। यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों में से एक माना जा रहा है, जिस पर देशभर की नजर बनी हुई है।


