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जंतर-मंतर पर बवाल, भूख हड़ताल कर रहे अभिजीत दीपके पर फेंकी गई स्याही

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की और शनिवार से अनशन पर बैठ गए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा और 20 जुलाई को प्रस्तावित "संसद चलो" मार्च हर हाल में आयोजित किया जाएगा।

जंतर-मंतर पर बवाल, भूख हड़ताल कर रहे अभिजीत दीपके पर फेंकी गई स्याही
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नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य कारणों से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की और शनिवार से अनशन पर बैठ गए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा और 20 जुलाई को प्रस्तावित "संसद चलो" मार्च हर हाल में आयोजित किया जाएगा। दीपके ने देशभर के समर्थकों से अपने-अपने राज्यों में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अपील भी की।

अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी गई, महिला हिरासत में

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके पर एक महिला द्वारा स्याही फेंकने का मामला भी सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला ने उनके करीब पहुंचकर स्याही फेंकी और कथित रूप से थप्पड़ मारने की भी कोशिश की। मौके पर मौजूद स्वयंसेवकों ने तत्काल महिला को पकड़ लिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया, हालांकि स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई।

दीपके ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि शनिवार सुबह जब वह कुछ समय के लिए धरना स्थल से बाहर गए थे, उसी दौरान पुलिस सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले गई। उनका दावा है कि जब वह वापस लौट रहे थे, तब पुलिस ने उनके साथ भी मारपीट की। दीपके ने कहा कि यदि प्रशासन को लगता है कि वांगचुक को अस्पताल ले जाने से आंदोलन समाप्त हो जाएगा, तो यह उसकी गलतफहमी है। उन्होंने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा और अब उनकी मांगों का दायरा भी बढ़ गया है।

'संसद चलो' मार्च पर कायम रहने का ऐलान

अभिजीत दीपके ने कहा कि पहले आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक सीमित था, लेकिन हालिया घटनाक्रम के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला

उधर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक को किसी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई के तहत नहीं, बल्कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के आधार पर अस्पताल पहुंचाया गया। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति लगातार कमजोर हो रही थी, इसलिए उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने यह भी कहा कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से की गई और प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर खाली करने की अपील की गई है।

सफदरजंग अस्पताल ने जारी किया स्वास्थ्य बुलेटिन

सफदरजंग अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लंबे समय से जारी उपवास और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण सोनम वांगचुक काफी कमजोर हो गए हैं। अस्पताल ने बताया कि उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन शरीर के आवश्यक स्वास्थ्य मानकों को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार चिकित्सकीय निगरानी, जांच और उपचार की आवश्यकता है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है।

पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने जताई आपत्ति

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने अस्पताल में मौजूद रहते हुए कहा कि उनकी, परिवार और वांगचुक का इलाज कर रहे चिकित्सकों की सहमति के बिना कोई दवा या उपचार शुरू नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी अनुमति के बिना कोई चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक दिन पहले तक वांगचुक की स्थिति नियंत्रण में थी और अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं थी।

अन्य प्रदर्शनकारी भी अनशन पर कायम

इस बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ता नेहा, आमीन और मनीष ने भी अपना अनशन जारी रखा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा संबंधी मुद्दों और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। फिलहाल जंतर-मंतर और सफदरजंग अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन की नजर एक ओर वांगचुक के स्वास्थ्य पर है, तो दूसरी ओर 20 जुलाई को प्रस्तावित "संसद चलो" मार्च को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।


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