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‘घूसखोर पंडित’ पर रोक की मांग, ब्राह्मण समुदाय की गरिमा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर

नेटफ्लिक्स की अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के टाइटल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले को लेकर अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है

‘घूसखोर पंडित’ पर रोक की मांग, ब्राह्मण समुदाय की गरिमा को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर
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नई दिल्ली। नेटफ्लिक्स की अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के टाइटल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले को लेकर अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

याचिका में दावा किया गया है कि टाइटल ‘घूसखोर पंडित’ ब्राह्मण समुदाय की गरिमा, प्रतिष्ठा और भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और जानबूझकर अपमानजनक बनाया गया है।

याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने बताया कि नेटफ्लिक्स ने इस फिल्म का प्रचार शुरू कर दिया है। ‘पंडित’ शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जो ब्राह्मण समुदाय के प्रति अपमानजनक और सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाला है।

याचिकाकर्ता खुद एक जागरूक नागरिक और आचार्य होने के नाते इस कंटेंट पर गंभीर आपत्ति जता रहे हैं। उनका कहना है कि फिल्म की रिलीज से ब्राह्मण समुदाय की छवि को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचेगा और सामाजिक सद्भाव बिगड़ेगा। याचिका में कहा गया है कि नेटफ्लिक्स और संबंधित नियामक संस्थाओं ने इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है। ऐसे में डर है कि यह शो सामूहिक मानहानि, हेट स्पीच और सांप्रदायिक तनाव पैदा करेगा, इसलिए उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप और अंतरिम रोक की मांग की है।

याचिका में अनुरोध किया गया है कि इसे अर्जेंट मानते हुए 6 फरवरी को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए। याचिका में यह भी उल्लेख है कि ‘पंडित’ शब्द हिंदू धर्म में विद्वान, पुजारी और आध्यात्मिक गुरु के लिए सम्मानजनक है। इसे भ्रष्टाचार से जोड़ना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अपील की है कि फिल्म या शो की रिलीज से पहले इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रोक लगाई जाए, ताकि सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बरकरार रहे।

नेटफ्लिक्स की ओर से अभी तक इस याचिका पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जहां इसे धार्मिक भावनाओं के अपमान के रूप में देखा जा रहा है।


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