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जासूसी करने वाले 99 फीसदी हिंदू, देश लूटकर भागने वालों में एक भी मुसलमान नहीं: हन्नान मोल्लाह

सीपीआईएम के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरएसएस का स्टैंडर्ड कंप्लेन है कि मुसलमान जहां रहता है

जासूसी करने वाले 99 फीसदी हिंदू, देश लूटकर भागने वालों में एक भी मुसलमान नहीं: हन्नान मोल्लाह
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नई दिल्ली। सीपीआईएम के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरएसएस का स्टैंडर्ड कंप्लेन है कि मुसलमान जहां रहता है, वहीं आतंकवादी है, चाहे वो स्कूल हो, मस्जिद हो या व्यापार। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले 30-40 लोगों में 99 फीसदी हिंदू हैं और देश का पैसा लूटकर विदेश भागने वाले 50 लोगों में एक भी मुसलमान नहीं है।

सीपीआईएम के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने कहा, "यह तो आरएसएस और भाजपा का स्टैंडर्ड कंप्लेन है। मुस्लिम जहां रहते हैं, स्कूल, मस्जिद, शादी और व्यापार, वो जहां रहते हैं, आतंकवादी हैं। इसके अलावा आरएसएस सोच नहीं सकती। एक सौ साल पहले आरएसएस बना था और ऐलान किया गया था कि भारत के हिंदू के तीन दुश्मन हैं, उसमें नंबर वन मुसलमान है।

सीपीआईएम सांसद ने कहा, "वो इससे पीछे नहीं हटी, सौ साल से यही काम कर रही है। जहां भी मौका मिलेगा, मुसलमान है तो उग्रवादी है। आज तक पाकिस्तान के लिए हमारे देश की अंदरूनी खबर भेजने वाले, जासूसी करने वाले जो 30-40 लोग पकड़े गए हैं, उनमें 99 फीसदी हिंदू हैं, एक भी मुसलमान नहीं है। हिंदुस्तान को लूट कर 50 लोग देश छोड़कर भाग गए, करोड़ों रुपये लेकर भागे, उनमें भी एक भी मुसलमान नहीं है, वो सभी गुजराती और हिंदू हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "ये चीजें आपकी आंखों के सामने हैं, पर आप इतने बर्बर हैं कि आप आंख मूंद कर रखेंगे जो देखना नहीं चाहते। जिसे देखना नहीं है, उसे जबरदस्ती नहीं दिखाया जा सकता। यह एक मानसिक बीमारी है और आप इस मानसिक बीमारी के शिकार हैं।"

हन्नान मोल्लाह ने कहा कि पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार करना तो चलता रहता है; भारत-पाकिस्तान के संबंधों में हॉट एंड कोल्ड कोई नई बात नहीं है।

भारत और अफगानिस्तान के मैच में वंदे मातरम गाए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि खड़ा तो रहना ही है, जैसा कि कोर्ट ने भी बोला था कि जब इसे राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया गया है तो जब इसे बजाया जाए तो खड़ा होना है, लेकिन उसी भाषा में गाना अनिवार्य नहीं है, यह कोर्ट ने भी बता दिया है। तो लोग तो इसकी इज्जत करेंगे, कोई बेइज्जत क्यों करेगा? हमारा झंडा, हमारा गाना, ये तो अच्छी बात है।


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