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खाली समय में गांव के बच्चों को कबड्डी सिखाते हैं दर्शन कादियान

कुछ टीमों के लिए प्रो-कबड्डी लीग सीजन-5 का सफर समाप्त हो गया है और उन टीमों के खिलाड़ी अपने घरों को लौट गए हैं

खाली समय में गांव के बच्चों को कबड्डी सिखाते हैं दर्शन कादियान
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नई दिल्ली। कुछ टीमों के लिए प्रो-कबड्डी लीग सीजन-5 का सफर समाप्त हो गया है और उन टीमों के खिलाड़ी अपने घरों को लौट गए हैं। लीग के बाद भी इन खिलाड़ियों के जीवन में कबड्डी खेलने का सफर और जुनून खत्म नहीं होता।

इनमें से एक टीम रही यू-मुंबा। मुंबई टीम के खिलाड़ी लीग का सफर समाप्त करने के बाद अपने-अपने कुनबे की ओर लौट गए। इस टीम के अहम रेडरों में शामिल दर्शन कादियान भी घर लौट चुके हैं, जहां वह बच्चों को कबड्डी सिखा रहे हैं।

इस सीजन में अनूप कुमार के नेतृत्व में बाकी 11 टीमों से भिड़ने वाली यू-मुंबा टीम के रेडर दर्शन कादियान ने इस सीजन में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने टीम के मुख्य रेडरों में स्वयं को शामिल किया। एक साक्षात्कार में दर्शन ने बताया कि लीग के बाद से मिले खाली समय में वह अपने गांव के बच्चों को कबड्डी सिखाते हैं।

हरियाणा में झझ्झर जिले के माजरा गांव के रहने वाले दर्शन ने कहा, "हम खिलाड़ी हैं। हमारे लिए लीग भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन कबड्डी का खेल कभी खत्म नहीं होता। मैं अब कुछ दिनों तक घर में आराम करूंगा, लेकिन इस बीच सुबह और शाम को दो घंटे अपने घर के पास स्टेडियम में बच्चों के साथ कबड्डी का प्रयास जारी रखूंगा।"

दर्शन ने कहा कि इस स्टेडियम में 10 से 14 साल के बच्चे कबड्डी सीखने आते हैं और वह सभी को अभ्यास कराते हैं। उन्होंने कहा, "इन बच्चों के लिए मैं एक बड़े भाई की तरह हूं। इसलिए, वे मेरी हर बात को ध्यान से सुनते और समझते हैं। इन बच्चों में कबड्डी का जुनून देखकर तो मुझे हैरानी भी होती है और अच्छा भी लगता है।"

घर पहुंचने के बाद मिले माहौल के बारे में उन्होंने कहा, "सभी बहुत खुश हैं। मुझे इस बात का मलाल है कि हमारी टीम आगे नहीं बढ़ पाई, लेकिन यहां जब लोगों की आंखों में सम्मान और गर्व देखा, तो कहीं न कहीं हौसला मिल गया। कादियान समूह के लोगों ने मेरे सम्मान में एक समारोह आयोजित किया था।"

दर्शन के परिवार में उनके भैय्या और भाभी हैं। दर्शन पांचवीं कक्षा में थे, जब उनके पिता का निधन हुआ और 2015 में उनका माता का भी देहांत हो गया। अपनी सफलता पर जहां उन्हें खुशी होती है, वहीं माता-पिता की कमी भी खलती है।

बकौल दर्शन, "माता-पिता के न होने का अकेलापन मुझे निराश करता है, लेकिन मैंने इसका प्रभाव अपने खेल पर नहीं पड़ने दिया, क्योंकि मेरी असफलता उन्हें भी दुख पहुंचाएगी। मैं आज जो भी हूं, उनके आशीर्वाद से हूं और ये आशीर्वाद हमेशा मुझ पर बना रहेगा।"

सातवीं कक्षा से दर्शन ने कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे इसमें रुचि बढ़ती गई, लेकिन आगे बढ़ते हुए पता चला कि प्रतिस्पर्धा काफी अधिक है। इसलिए, सोच लिया था कि कड़ी मेहनत करेंगे और आज उसी कड़ी मेहनत का नतीजा मिला है। इस बीच, जब चोटें लगती थी तो परिवार वाले कबड्डी को छोड़ने के लिए कहते थे, लेकिन उन्होंने नहीं छोड़ा।

दर्शन सेना में कार्यरत हैं और सर्विसेस की टीम से खेलते हैं। ऐसे में वह दिसंबर के पहले सप्ताह से आयोजित होने वाले घरेलू प्रतियोगिताओं की तैयारी शुरू कर देंगे। इसके लिए वह नासिक में अन्य खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण करेंगे।

इस सीजन में मुंबई के लिए 16 मैच खेलने वाले दर्शनका कहना है कि उन्होंने अपनी एक पहचान बना तो ली है, लेकिन इसमें भी कुछ कमी बाकी है, जिसे वह अगले सीजन में पूरी करने की कोशिश करेंगे।

दर्शन ने कहा कि लीग में अगर अच्छा करने के लिए तारीफें मिलती हैं, तो खराब प्रदर्शन के लिए आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है। एक खिलाड़ी के तौर पर प्रशंसकों की खुशी के लिए जितना किया जाए, वो कम है। उनका समर्थन ही आपको आगे बढ़ने का रास्ता दिखाता है।

लीग के दौरान दर्शन को टीम के साथी खिलाड़ियों का भी साथ मिला और खासकर कप्तान अनूप कुमार का। उन्होंने कहा कि मैच के दौरान गलती पर झाड़ भी पड़ती है और उसे ठीक करने के लिए सुझाव भी मिलते हैं।

सीजन में प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर दर्शन ने कहा कि वह इससे खास संतुष्ट नहीं हैं। बकौल दर्शन, "मैंने इस सीजन में और भी अच्छा खेलनी की सोची थी, जो दुर्भाग्य से नहीं हो पाया। मेरे लिए हालांकि, सफर खत्म नहीं हुआ है। मैं और भी कड़ी मेहनत करूंगा और अपनी कमियों को सुधारते हुए और अगले सीजन में बेहतरीन प्रदर्शन दूंगा।"


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