कॉफी की खुशबू से महकेंगे दंतेवाड़ा, नारायणपुर और कोंडागांव जिले
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कोडागांव, नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले अब नक्सलियों की दहशत व आतंक नहीं बल्कि सकारात्मक कारणों से अपनी अलग पहचान बना रहे

जगदलपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कोडागांव, नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले अब नक्सलियों की दहशत व आतंक नहीं बल्कि सकारात्मक कारणों से अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। नक्सलियों के आतंक से दहशत में रहने वाले बस्तर के दरभा की वादियों में कॉफी की खुशबू फैलनी शुरू हो गई है।
इसी कोशिश को आगे बढ़ाते हुए उद्यानिकी काॅलेज के वैज्ञानिक और विभाग के अधिकारी किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए पहली बार कोडागांव, नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले में कॉफी की खेती करवाने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये तीनों जिले जलवायु की दृष्टि से उपयुक्त हैं, जहां कॉफी की खेती की जा सकती है।
उद्यानिकी कालेज के वैज्ञानिक केपी सिंह ने बताया कि इन तीनों जिलों में जहां पर काॅफी की खेती की जाएगी वह समुद्र तल से कॉफी ऊंचाई पर हैं। इसके कारण तापमान और इलाके की जमीन कॉफी की खेती के लिए उपयुक्त है। मौसम, जलवायु और मिट्टी के अनुकूल होने के चलते ही यहां कॉफी की खेती करने का निर्णय लिया गया है जो तीन महीने के बाद शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत में इस समय करीब साढ़े चार लाख हेक्टेयर में कॉफी की खेती की जा रही है।
खेती के दौरान किसानों को कोई परेशानी न हो इसलिए उद्यानिकी विभाग बकावंड के किसान ईशांश सिंह और उद्यानिकी काॅलेज से पौधे लेने के साथ ही ओडिशा के कॉफी बोर्ड से पौधे मंगाएगा। इस योजना के तहत अब तक हुए निर्णय के अनुसार किसानों को यह पौधे मुफ्त में दिए जाएंगे। नारायणपुर और दंतेवाड़ा में 15-15 जबकि कोंडगांव में करीब 20 हेक्टेयर जमीन में खेती की जाएगी।
प्रशासन के सहयोग से दरभा में तीन साल पहले 20 एकड़ की जमीन में कॉफी की खेती की गई थी। जिसमें इन दिनों फल आने लगे हैं।
उन्होंने बताया कि कोंडागांव, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जिला तीन साल के बाद कॉफी की खशुबू से महकने लगेंगे। नक्सली घटनाओं के लिहाज से ये तीनो जिले अतिसंवेदनशील क्षेत्र हैं। जहां आज भी नक्सली छुट-पुट घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं या फिर पुलिस से उनकी मुठभेड़ की खबरें आती हैं। बावजूद इसके किसानों की आय बढ़ाने और मौसम के अनुकूल होने से यहां पर कॉफी की खेती का फैसला लिया गया है।
उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक अजय कुशवाहा ने बताया कि एक बार पौधे लगने के बाद 45-50 साल तक यह उत्पादन देती रहती है। तीनों जिलों में खेती करने की योजना बना ली गई है। उम्मीद है कि नए साल में इसकी खेती शुरू हो जाएगी। इसकी खेती करने से किसानों को भरपूर लाभ मिलेगा।


