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सीएसआर स्थानीय बोली में सामग्री प्रसारित करने के लिए मंच प्रदान करता है : अनुराग ठाकुर

सूचना एवं प्रसारण, युवा मामले एवं खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि सामुदायिक रेडियो स्टेशन (सीआरएस) स्थानीय बोली में सामग्री प्रसारित करने के लिए बहुत जरूरी मंच प्रदान करता है

सीएसआर स्थानीय बोली में सामग्री प्रसारित करने के लिए मंच प्रदान करता है : अनुराग ठाकुर
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चेन्नई। सूचना एवं प्रसारण, युवा मामले एवं खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि सामुदायिक रेडियो स्टेशन (सीआरएस) स्थानीय बोली में सामग्री प्रसारित करने के लिए बहुत जरूरी मंच प्रदान करता है।

क्षेत्रीय सामुदायिक रेडियो सम्मेलन (दक्षिण) के दौरान विश्‍व रेडियो दिवस के अवसर पर चेन्नई के अन्ना विश्‍वविद्यालय में एक समारोह को वर्चुअल तौर पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "सामुदायिक रेडियो स्टेशन एक मंच प्रदान करते हैं, जहां सामग्री स्थानीय बोलियों और क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारित की जाती है।"

उन्होंने कहा कि इन स्टेशनों पर स्थानीय मुहावरों में स्थानीय मुद्दे उठाए जाते हैं और उन पर चर्चा की जाती है।

उन्होंने कहा, “सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास और सबका प्रयास के लिए प्रतिबद्ध है। इस संदर्भ में सामुदायिक रेडियो को समझना महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने कहा कि रेडियो कितना महत्वपूर्ण है, इसका सबसे अच्छा उदाहरण यह है कि हमें यह देखना चाहिए कि पीएम मोदी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में कैसे उदाहरण पेश करते हैं।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सम्मेलन सीआरएस समुदाय को करीब लाने के लिए एक आदर्श मंच हैं।

उन्होंने कहा, "जो संस्थान कई जिलों में काम करते हैं, उन्हें संचालन के विभिन्न जिलों में अधिकतम 6 सीआरएस स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते वे मंत्रालय द्वारा निर्धारित कुछ शर्तों को पूरा करते हों।"

उन्होंने कहा कि ग्रांट ऑफ परमिशन एग्रीमेंट (जीओपीए) की प्रारंभिक समयावधि को बढ़ाकर दस (10) वर्ष कर दिया गया है।

उन्होंने कहा, “सीआरएस के लिए विज्ञापन का समय 7 मिनट प्रति घंटा से बढ़ाकर 12 मिनट प्रति घंटा कर दिया गया है। किसी संगठन को जारी किए गए आशय पत्र की वैधता एक वर्ष निर्धारित की गई है।”

उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति के लिए आवेदक को तीन महीने का बफर भी दिया गया है।

सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने कहा कि सामुदायिक रेडियो एक अग्रणी अवधारणा है और यह समुदाय की अनसुनी आवाजों को एक मंच प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि ये स्टेशन लोगों तक गहराई से और सीधे पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि ये स्टेशन स्थानीय रूप से प्रासंगिक कार्यक्रम बनाते हैं, जो समुदाय के लिए उपयोगी होते हैं।

दक्षिणी सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के लिए दो दिवसीय क्षेत्रीय सामुदायिक रेडियो सम्मेलन ने भारत में सामुदायिक रेडियो के 20 साल पूरे होने का भी जश्‍न मनाया।


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