प्रयाग में माघ मेले पर भारी पड़ सकता है कोरोना वायरस
तीर्थराज प्रयाग में पतित पावनी गंगा , श्यामल यमुना और अंत: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के तट पर एक माह से अधिक समय तक बसने वाला आध्यात्मिक ‘माघ मेला’ पर वैश्विक महामारी कोरोना का कहर भारी पड़ सकता है।

प्रयागराज । तीर्थराज प्रयाग में पतित पावनी गंगा , श्यामल यमुना और अंत: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के तट पर एक माह से अधिक समय तक बसने वाला आध्यात्मिक ‘माघ मेला’ पर वैश्विक महामारी कोरोना का कहर भारी पड़ सकता है।
मेला अधिकारी रजनीश मिश्रा ने शनिवार को यहां बताया कि माघ मेला आयोजित कराये जाने के लिए अभी कुछ तय नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से कोरोना का संक्रमण फैल रहा है, ऐसे हालात में लाखों लोगों का एकत्रित होना खतरनाक हो सकता है। शासन से जैसा निर्देश मिलेगा, वैसे ही किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ने कहा था कि परंपरा का निर्वहन करते हुए मेला कराया जाएगा। मेले को लेकर बैठक भी हो चुकी है लेकिन अभी मेले का स्वरूप कुछ तय नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक, धार्मिक और सामाजिक समागम की तैयारी हर साल करीब 14 विभाग जुलाई व अगस्त बाढ़ का पानी उतरने के बाद शुरू कर देते थे। इस बार कोरोना के संक्रमण ने स्थिति को असमंजस में डाल दिया है। माघ मेला पौष पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलता है।
मेले में मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि स्नान पर्व पड़ते हैं। इस दौरान जप, तप और संयम का कल्पवास करते हैं। इस दौरान सम्पूर्ण वातावरण आध्यत्मय हो जाता है। पूरे मेले में कहीं कृष्ण लीला तो कहीं राम चरित्र का गुणगान होता रहता है। कड़कडाती सर्दी पर आस्था भारी पडती है और श्रद्धालु तड़के आस्था की डुबकी लगाते हैं। इस दौरान जप,तप, स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। लाखों श्रद्धालु माघ मेले में बिना निमंत्रण और आमंत्रण पर पहुंचते हैं।


