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कोरोना संकट : लोग हुए सतर्क, डर हुआ कम

कोरानावायरस महामारी की वजह से आतंकित जनता में उत्पन्न भय में अब कमी आई

कोरोना संकट : लोग हुए सतर्क, डर हुआ कम
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नई दिल्ली । कोरानावायरस महामारी की वजह से आतंकित जनता में उत्पन्न भय में अब कमी आई है। यह जानकारी आईएएनएस सीवोटर कोविड ट्रैकर से मिली। सी-वोटर के संस्थापक- निदेशक यशवंत देशमुख ने कहा कि ट्रैकर के तीसरे हफ्ते में भय के इंडेक्स में कमी आई है।

उन्होंने कहा कि वास्तव में लोग ज्यादा सतर्क हुए हैं और वे ज्यादा सूचना एकत्र कर रहे हैं और इस भय को नियंत्रण में करने के लिए ज्यादा तैयारी की जा रही है।

हालांकि ट्रैकर स्पष्ट सामाजिक-आर्थिक ट्रेंड को सामने लाती है जोकि डाटा में स्पष्ट है।

देशमुख ने कहा कि जैसे ही शिक्षा का स्तर बढ़ा है, ज्यादा लोग सचेत हो रहे हैं कि यह खतरा वास्तविक है, बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया नहीं।

उन्होंने कहा, "और जैसे-जैसे आय का स्तर गिरता जा रहा है, वैसे-वैसे अधिक लोग घबरा रहे हैं कि वे संक्रमित होने जा रहे हैं। संक्षेप में, पिरामिड के निचले भाग में अधिक घबराहट हो रही है, लेकिन मध्यवर्ग स्थिर है।"

तीसरे ट्रैकर को 4-6 अपैल को आयोजित किया गया था और लगभग सभी राज्यों से 1,114 सैंपल लिए गए थे।

जब लोगों से यह पूछा गया कि क्या वे इस बात से डरे हुए हैं कि उन्हें या उनके परिवार को कोरानावायरस हो जाएगा, 43.6 प्रतिशत लोगों ने हां कहा, जबकि 53.6 प्रतिशत लोगों ने इससे असहमति जताई।

इस तरह की प्रतिक्रियाएं ऐसे समय सामने आई है जब राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की अवधि जल्द ही पूरी होने वाली है, लेकिन इसे कम से कम हॉटस्पॉट में बढ़ाए जाने और चरणबद्ध तरीके से हटाए जाने की उम्मीद है।

सामाजिक आर्थिक समूहों में, फ्रेशर्स में भय का इंडेक्स सबसे ज्यादा है जो कि 25 से कम उम्र के हैं, जिसमें से 50.6 प्रतिशत इसके लेकर सहमत हैं। वहीं 60 वर्ष से उपर 49.3 प्रतिशत लोगों को इसका भय है, जोकि इस क्रम में दूसरे स्थान पर हैं।

उसी तरह, कम पढ़े लिखे तबकों में भय का माहौल 44 प्रतिशत और अधिका शिक्षित वर्गो में यह प्रतिशत 39.8 है।

आय के स्तर में, भय का स्तर निचले आय वाले लोगों में ज्यादा है और इनका प्रतिशत 45.6 है जबकि उच्च आय समूहों में 37.9 प्रतिशत लोग डरे हुए हैं।



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