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कांग्रेस 29 अक्टूबर के बाद बागियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के मूड में

हिमाचल प्रदेश में 12 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में टिकट को लेकर विवाद खत्म होने के बावजूद कई जगह नेताओं में असंतोष है।

कांग्रेस 29 अक्टूबर के बाद बागियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के मूड में
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शिमला: हिमाचल प्रदेश में 12 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में टिकट को लेकर विवाद खत्म होने के बावजूद कई जगह नेताओं में असंतोष है।

पार्टी ने नामांकन के अंतिम दिन हमीरपुर से प्रत्याशी की घोषणा भी कर दी। कई जगह असंतुष्ट नेताओं ने बतौर आजाद प्रत्याशी नामांकन किया है। पार्टी के बड़े नेता इन्हें मनाने में जुट गए हैं। उनतीस अक्टूबर नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है। असंतुष्ट नेता यदि इस दिन तक नहीं मानते हैं तो उनके खिलाफ पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी। पार्टी का कहना है कि 29 से पहले मानने वालों को पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा।

अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और प्रचार समिति के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू को नाराज नेताओं से बात करने को कहा है। पार्टी का कहना है कि जब संगठन की लंबे समय तक सेवा की है तो चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी के साथ चलना चाहिए। प्रतिभा सिंह और सुक्खू ने जिलों के दौरे शुरू कर दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि पच्छाद से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर ने आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया है। चैपाल में भी पूर्व विधायक डा. सुभाष मंगलेट और ठियोग में विजयपाल सिंह खाची ने आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन पत्र भरा है। शिमला शहरी, झंडूता, गगरेट आदि विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के कई दिग्गज टिकट न मिलने से नाराज हैं। प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष निगम भंडारी और कार्यकारी अध्यक्ष यदोपति ठाकुर को भी टिकट नहीं मिला है।

श्रीमती सिंह ने चुनाव प्रचार के लिए नेताओं की ड्यूटी लगाई है। प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पराज शर्मा को मंडी सदर विधानसभा क्षेत्र, प्रदेश सचिव विकास चौहान को रामपुर, पूर्व राज्य संगठक कांग्रेस सेवादल संतोष डोगरा और संजीव कुमार को शिमला शहर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी है।


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