नाम बदलने पर योगी को बधाइयां, विरोधियों ने कसे तंज
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनभावनाओं की कद्र करते हुए इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया

- रतिभान त्रिपाठी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनभावनाओं की कद्र करते हुए इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया। तकरीबन साढ़े चार सौ साल पहले मुगल सल्तनत में बदले गए पौराणिक नाम प्रयागराज को फिर से उसका गौरव हासिल हो गया है। नामकरण पर प्रयागराज ही नहीं देश भर की अधिकांश जनता खुश होकर योगी आदित्यनाथ को बधाइयां दे रही है। वहीं सियासी विरोधी तंज कसने में पीछे नहीं रहना चाहते।
मध्यकालीन भारत से पहले इलाहाबाद का नाम प्रयागराज ही हुआ करता था। वैसे तो देश भर में चौदह प्रयाग हैं लेकिन पुराणों में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर बसे प्रयाग को सभी प्रयागों में श्रेष्ठ माना गया। ब्रह्मपुराण, विष्णु पुराण, पद्म पुराण, वृहन्नारदीय पुराण, मार्कण्डेय पुराध, ब्रह्मवैवर्त पुराण, अग्नि पुराण आदि में इसे प्रयागों का राजा कहा गया है। पुराण ही कहते हैं कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि के सर्वश्रेष्ठ यज्ञ इसी भूमि पर किये हैं इसीलिए विष्णु जी और शिव जी ने इसे सबसे अधिक गौरवशाली तीर्थ मानते हुए प्रयागराज की पदवी दी थी। कालान्तर में इसके नाम बदलते रहे। कभी चंद्रवंशीय नरेशों के वंशज राजा इला के नाम पर इलावर्त और इलावास के नाम से भी इसे पुकारा जाता रहा है लेकिन इसके मूल नाम की महत्ता कभी कम नहीं हुई।
इतिहासकार कहते हैं कि मुगल बादशाह अकबर ने जब यमुना तट पर किले का निर्माण कराया। इसी दरम्यान उसने एक नया धर्म चलाया, जिसका नाम दीन-ए-इलाही रखा था। तो उसने इलावास क्षेत्र का नाम बदलकर इलाहाबाद कर दिया। जिसे बाद में अंग्रेजों ने अपनी भाषा में अल्लाहाबाद लिखना शुरू कर दिया। इस तरह प्रयागराज नाम आधुनिक इतिहास से गायब हो गया लेकिन जनमानस के जेहन में अमर रहा। योगी सरकार ने इस नाम का तोहफा देश-दुनिया को सौंप दिया। इलाहाबाद नाम अब इतिहास के पन्नों में सिमट गया। रेलवे स्टेशन और अन्य संस्थाओं का नाम भी अब प्रयागराज हीे हो जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षाविद डॉ राम नरेश त्रिपाठी कहते हैं कि गुलामी के प्रतीक नाम को बदलकर योगी सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान किया है। यह सरकार बधाई की पात्र है। जाने माने संत श्री हरिचैतन्य ब्रह्मचारी कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ जी का यह सराहनीय कार्य है। क्रियायोग मर्मज्ञ योगी सत्यम ने भी प्रयागराज नामकरण पर मुख्यमंत्री का आभार जताया है। युवा पत्रकार मोहम्मद मोईन ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि 444 साल बाद मुगलिया गुलामी की पहचान से मुक्ति मिलना मातम नहीं, उत्सव का मौका है।
दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर, आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह तथा सपा के कुछ नेताओं ने प्रयागराज नामकरण पर योगी सरकार पर तंज कसा है। कुछ विरोधी नेता असमंजस में हैं कि वह विरोध की बात लिखेंगे तो लोग नाराज न हो जाएं, इसलिए कुछ लिख नहीं पा रहे।


