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भाजपा-कांग्रेस के बीच आदिवासी हितैषी बताने की होड़

मध्य प्रदेश की सत्ता का रास्ता आदिवासियों के साथ के बगैर पूरा नहीं किया जा सकता, इसे राजनीतिक दल भलीभांति जानते हैं

भाजपा-कांग्रेस के बीच आदिवासी हितैषी बताने की होड़
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भोपाल। मध्य प्रदेश की सत्ता का रास्ता आदिवासियों के साथ के बगैर पूरा नहीं किया जा सकता, इसे राजनीतिक दल भलीभांति जानते हैं , यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस खुद को आदिवासी हितैषी बताने में लगे हैं और इसका जोर-शोर से भी प्रचार कर रहे हैं। राज्य में आदिवासी वर्ग की आबादी 21 प्रतिशत से ज्यादा है, इसका आशय है कि हर पांचवां व्यक्ति इस आबादी का है। इससे यह साफ जाहिर है कि राज्य में अगर आपको सत्ता हासिल करना है तो इस वर्ग का साथ बहुत जरूरी है। इस बात को राजनीतिक दल भली-भांति जान गए हैं। यही कारण है कि दोनों ही दल अपने-अपने तरह से आदिवासियों को रिझाने में लगे हैं।

राज्य में इस वर्ग का दिल जीतने के लिए अपनी-अपनी छाती ठोकने की शुरूआत इसी साल अगस्त माह में हुई, जब आदिवासी दिवस को लेकर कांग्रेस व भाजपा आमने-सामने आ गए, क्योंकि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में नौ अगस्त को आदिवासी दिवस मनाया था, वहीं भाजपा ने इस दिन को प्रवासी दिवस कहकर 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का ऐलान कर दिया, इस दिन आदिवासियों के नायक बिरसा मुंडा का जन्मदिन भी है।

भाजपा ने 15 नवंबर को जनजाति गौरव दिवस मनाने का ऐलान किया है इस मौके पर भोपाल में होने जा रहे भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा लेने वाले हैं। भाजपा के तमाम नेता अपनी केंद्र और राज्य की सरकारों की योजनाओं के जरिए अपने को जनजाति का हितैषी बता रही है और अब तक लिए गए फैसलों का ब्यौरा भी दे रही है।

कांग्रेस ने 15 नवंबर को जबलपुर में बिरसा मुंडा जयंती समारोह का आयोजन किया है । इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ दिग्विजय सिंह सहित हिस्सा लेंगे। कांग्रेस लगातार भाजपा सरकार के कार्यकाल में आदिवासियों पर अत्याचार किए जाने और उनकी उपेक्षा के आरोप लगा रही है। वहीं कांग्रेस के काल में आदिवासियों के लिए किए गए कामों का ब्यौरा दे रही है।


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