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दुष्कर्म के मामलों में मुआवजा :हाईकोर्ट ने 5 साल में दिए मुआवजे की जानकारी मांगी

बिलासपुर ! महिलाओं से दुष्कर्म के मामलों मुआवजे व अन्य सुविधाओं को लेकर लगाई गई याचिका पर आज हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देशित किया कि पीडि़त क्षतिपूर्ति योजना 2011 के

दुष्कर्म के मामलों में मुआवजा :हाईकोर्ट ने 5 साल में दिए मुआवजे की जानकारी मांगी
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राज्य के सभी न्यायालयों को योजना का प्रारुप भेजने के भी निर्देश
बिलासपुर
! महिलाओं से दुष्कर्म के मामलों मुआवजे व अन्य सुविधाओं को लेकर लगाई गई याचिका पर आज हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देशित किया कि पीडि़त क्षतिपूर्ति योजना 2011 के प्रतिलिपियां छत्तीसगढ़ के सभी कोर्ट में भेंजे। वर्ष 2011 से अब तक कितने मामले में मुआवजा के लिए अनुशंसा व आवेदन दिए गए हैं उसकी जानकारी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को शपथ पत्र के साथ देने को कहा गया है। अगली सुनवाई 8 मार्च को होगी।
जानकारी के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले की सामाजिक कार्यकर्ता संतरा बाई व बिन्देश्वरी ने अनाचार पीडि़त महिलाओं के खिलाफ उचित मुआवजा नहीं दिए जाने के खिलाफ वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में अधिवक्ता मीना शास्त्री के माध्यम से याचिका लगाई। याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शासन से जवाब तलब किया था। शासन ने अपने जवाब में हाईकोर्ट को बताया कि अनाचार पीडि़त क्षतिपूर्ति 2011 योजना तैयार कर अनाचार पीडि़त नाबालिग को दिया जाने वाला मुआवजा 50 हजार से बढ़ाकर तीन लाख व बालिग को 25 हजार से बढ़ाकर एक लाख रूपए कर दिया है। आज मामले पर हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक गुप्ता व संजय श्याम अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को आदेशित किया है कि वर्ष 2011 से अब तक कितने को मुआवजा दिया गया है और कितने मामले में मुआवजा के लिए अनुशंसा की गई है और कितने आवेदन आए हैं। उसकी जानकारी पत्र के साथ प्रस्तुत करें वहीं रजिस्ट्रार जनरल को निर्देशित किया है कि अनाचार पीडि़त क्षतिपूर्ति 2011 अधिनियम के प्रतिलिपियां छत्तीसगढ़ के सभी कोर्ट को उपलब्ध कराएं।
निलंबन से बहाली पर नहीं हो सकता ट्रांसफर
जिला राजनांदगांव निवासी मोहित कुमार बजरंग ग्राम चकनार, विकासखण्ड-छुईखदान, जिला-राजनांदगांव में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर पदस्थ थे, उनके विरुद्ध कुछ शिकायतें प्राप्त होने पर कलेक्टर राजनांदगांव द्वारा उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया था परंतु कुछ माह पश्चात् जब उन्हें निलंबन से बहाल किया गया तो उनका स्थानांतरण ग्राम चकनार, विकासखण्ड-छुईखदान, जिला- राजनांदगांव से ग्राम सरखेड़ा, विकासखण्ड मानपुर, जिला-राजनांदगांव कर दिया गया। उक्त स्थानांतरण आदेश से क्षुब्ध होकर मोहित कुमार बजरंग द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर में याचिका दायर की गई। अधिवक्ता द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा पूर्व में भोपाल टांडे विरुद्ध छ.ग.शासन एवं अन्य के वाद में यह अवधारित किया गया है कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी को निलंबन से बहाल किया जाता है तो उसका किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरण नहीं कर उसे पूर्व के स्थान में ही पदस्थ किया जायेगा। उच्च न्यायालय द्वारा उक्त मामले की सुनवाई के पश्चात कलेक्टर राजनांदगांव को यह निर्देशित किया कि वे याचिकाकर्ता के स्थानांतरण आदेशको निरस्त कर उसे पूर्व के स्थान पर पदस्थ करें।


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