कोल इंडिया से समझौता, तीन महीने टली मजदूरों की हड़ताल
कोल इंडिया में सोमवार से प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल रविवार को कोलकाता में उप श्रम आयुक्त की उपस्थिति में समझौता पत्र तैयार होने के बाद आगामी तीन माह के लिए टाल दी गई है......
सीएमपीएफ का ईपीएफ में नहीं होगा विलय, खदान बंद करने से पहले होगी चर्चा
कोरबा। कोल इंडिया में सोमवार से प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल रविवार को कोलकाता में उप श्रम आयुक्त की उपस्थिति में समझौता पत्र तैयार होने के बाद आगामी तीन माह के लिए टाल दी गई है। कोल इंडिया के 5 प्रमुुुुख श्रम संगठनों ने यह हड़ताल फिलहाल वापस ले ली है। हड़ताल वापस लेने से जहां कोयला उद्योग ने राहत की सांस ली है वहीं कोयला कर्मियों में हर्ष की लहर दौड़ पड़ी की आखिर उनकी एकजुटता और दबाव के आगे प्रबंधन को झुकना ही पड़ा।
कोयला उद्योग में विभिन्न मांगों खासकर सीएमपीएफ में विलय रोकने सहित अन्य मांगों को लेकर 19 से 21 जून तक होने वाली 72 घंटे की हड़ताल को टालने रविवार को कोलकता में बैठक आयोजित की गई। इसमें कोल मंत्रालय के उप सचिव महेन्द्र प्रताप, पांच प्रमख ट्रेड यूनियन और कोलकता के उप श्रमायुक्त एस चटर्जी शामिल हुए। करीब चार घंटे तक चली मैराथन बैठक में कोल इंडिया ने सीएमपीएफ का ईपीएफओ में विलय रोकने, कोल कर्मियों केा पेंशन फंड में बराबर का सहयोग देने और दो माह में नया 10वां वेतन समझौता पूरा करने, खदान बंद करे से पहले चर्चा करने का लिखित आश्वासन दिया। दोनों पक्षों के बीच समझौता पत्र तैयार किया गया जिसके बाद श्रमिक नेताओं ने कोयला उद्योग में प्रस्तावित हड़ताल को तीन माह के लिए टालने की घोषणा की। बैठक में कोल मंत्रालय की ओर से मुख्य प्रबंधक औद्योगिक संबंध एके सक्सेना, महाप्रबंधक तृप्ति पराग, सलाहकार भगवान पांडे, मुख्य प्रबंधक मनोज कुमार, श्रम संगठनों की ओर से एचएमएस नेता नाथूलाल पांडे, राजेन्द्र प्रसाद सिन्हा, बीएमएस नेता बीके राय, पीके दत्ता, इंटक नेता राजेन्द्र प्रताप सिंह, एसक्यू जामा, सीटू नेता डीडी रामानंदन और एटक नेता रमेन्द्र कुमार उपस्थित थे। उप श्रमायुक्त कार्यालय में दोनों पक्षों ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर उल्लंघन नहीं करने का भरोसा दिलाया।
मजदूरों की ऐतिहासिक जीत- दीपेश
एटक नेता दीपेश मिश्रा ने कहा कि उद्योग घराना परस्त सरकार और प्रबंधन ने कोयला मजदूरों की चट्टानी एकता के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने कहा कि 17 साल पहले 2001 में बाजपेयी सरकार ने कोयला उद्योग राष्ट्रीयकरण संशोधन बिल संसद में लाया था उस समय भी कोयला मजदूरों के एकता सामने सरकार ने बैकफुट में आकर कोयला उद्योग राष्ट्रीयकरण संशोधन बिल वापस लिया था और आज भी फिर से वही स्थिति निर्मित्त हो गई। सरकार ने सीएमपीएफ और ईपीएफ के विलय को मजदूरों के दबाव के चलते वापस ले लिया है, यह कोयला मजदूरों की ऐतिहासिक जीत है।
एकता बनाए रखें- सिंह
जेबीसीसीआई के सदस्य व एसकेएसएस (एटक) के केन्द्रीय महामंत्री हरिद्वार सिंह ने कोयला मजदूरों को प्रचंड एकता बनाये रखने के लिए बधाई देते हुए कहा है कि भविष्य में भी इसी प्रकार एकता के दम पर हम सरकार को झुकाते रहेंगे। उन्होंने मजदूरों से अपील किया कि 19 जून से अपने ड्यूटी पर अव,य जाएं ताकि किसी मजदूर का आर्थिक नुकसान न हो सके।


