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स्वच्छता अभियान पर्याप्त नहीं साफ सुथरी राजनीति की वकालत हो

देश में प्रधानमंत्री मोदी के आव्हान पर जिस तरह स्वच्छता अभियान पर बल दिया जा रहा है अगर उसी तरह राजनीति में भी सफाई नहीं आई तो समाज में असंतुलन और कुरीतियों का दौर नहीं मिट पाएगा

स्वच्छता अभियान पर्याप्त नहीं साफ सुथरी राजनीति की वकालत हो
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देश में प्रधानमंत्री मोदी के आव्हान पर जिस तरह स्वच्छता अभियान पर बल दिया जा रहा है अगर उसी तरह राजनीति में भी सफाई नहीं आई तो समाज में असंतुलन और कुरीतियों का दौर नहीं मिट पाएगा। साफ सुथरी राजनीति से ही समाज का विकास संभव हो पाएगा। यह जरूरी भी है चाहे इसके लिए कड़े नियम क्यों न बने। इस मामले पर राजनीति में सेवानिवृत्ति की समय सीमा तय होनी चाहिए इसके साथ ही राजनीति में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने चुनावों में 50 प्रतिशत टिकटों की मांग भी अब जायज है।

यह दोनों बातें समर्थन योग्य है। राजनीति में दो-तीन बातें अब बहुत जरूरी है कि वह साफ सुथरी कैसे बने आीैर उसके संचालन में युवाओं की भागीदारी कितनी हो। यह वाकई अजीबोगरीब बात है कि सरकारी और गैर सरकारी सेवाओं में सेवा की अवधि तो तय होती है पर राजनीति में न तो योग्यता तय हो्ती है और न ही सेवा अवधि।

इसके दुष्परिणाम से राजनीति दिनों दिन दूषित होते चली गई। आज राजनीति में कोई धर्म नहीं है। अपना ईमानधरम बेचकर राजनीति करने वाले कितने राजनेता आज जेल के सींकचों में बंद है। इसमें नाम लेने की जरूरत भी नहीं है।

भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे नेताओं की बड़ी भीड़ आपको कहीं भी किसी भी प्रदेश में मिल जाएगी। मध्यप्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा तो पेड न्यूज के मामले में फंसे हुए हैं। चुनाव आयोग ने उनको तीन साल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। इन सब बातों का मतलब है कि राजनीति में सब कुछ गड़बड़ है और इसके शुद्धिकरण की बड़ी जरूरत है।

सवाल है कि कोयले के खदान में सब काला ही काला तो आखिर राजनीति को पाक साफ रखने का उपाय क्या है? इस पर गंभीरता से सोचने का समय है। पारदर्शी राजनीति से ही स्वच्छता लाई जा सकेगी। हमारा मानना है किर युवाओं को अब राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाने का समय आ गया है। वे साफ सुथरी राजनीति की वकालत करें। युवा छात्र जीवन से ही राजनीति समझने लग गए हैं।

यदि युवा राजनीति में ईमानदार राजनीति की शुरूआत करें तो निश्चित ही इसका प्रतिफल सामने आएगा। इसके लिए सभी दलों को बड़ी संख्या में योग्य ईमानदार स्वच्छ छवि वाले युवाओं को टिकट देकर सामने लाना चाहिए और 60-65 साल राजनीति की सेवा मुक्ति का समय घोषित हो जाना चाहिए। जब तक योग्य लोगों का चयन नहीं होगा तब तक साफ सुथरे वातावरण का निर्माण संभव नहीं है। अगर अब बेहतर ढंग से साफ सुथरी राजनीति की वकालत नहीं की गई तो आने वाला समय भयावह होगा।


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