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शिक्षा के मंदिर में बच्चे नहीं सुरक्षित !

 शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलते हैं, लेकिन स्कूल में शिक्षा व सुरक्षा के मानक को पूरे करने की बात होती है तो कुछ विद्यालय पूरा करते हैं

शिक्षा के मंदिर में बच्चे नहीं सुरक्षित !
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ग्रेटर नोएडा। शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलते हैं, लेकिन स्कूल में शिक्षा व सुरक्षा के मानक को पूरे करने की बात होती है तो कुछ विद्यालय पूरा करते हैं बहुत से ऐसे विद्यालय हैं जिन्होंने मानक को दरकिनार कर स्कूल को व्यवसाय का रूप दे रखा है। ऐसे में अगर कोई घटना हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती है। गुड़गांव में एक बच्चे की निर्मम हत्या से अभिभावक बेहद दु:खी हैं, आखिर उनके बच्चे स्कूल में सुरक्षित नहीं है तो उन्हें कहां पढ़ाएं।

शहर में बहुत से स्कूल हैं जिसमें बिना जांच किए बाहरी लोगों को जाने दिया जाता है, यहां तक की कई बड़े स्कूल हैं जिसमें स्कूल के बच्चों के साथ बस के ड्राइवर, चपरासी, सफाई कर्मी सभी एक ही टायलट का प्रयोग करते हैं ऐसे में कोई घटना घट जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। निजी स्कूलों में बिना पुलिस वेरीफिकेशन के रख लिया जाता है, स्कूल प्रशासन कर्मचारियों का वेरीफिकेशन कराने की जहमत ही नहीं उठाती। स्कूल प्रशासन बड़े-बड़े दावे तो करते हैं लेकिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाते हैं। वहीं अभिभावकों का कहना है कि जब बच्चों की शिक्षा के लिए स्कलों को मोटी फीस देते हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होती है।

प्रवीण रॉय, प्रधानाचार्य समसारा स्कूल

सभी स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने चाहिए, हर जगह सीसीटीवी कैमरे के साथ टीचिंग स्टॉफ के साथ अन्य कर्मचारियों की काउंसलिंग व मेडिकल जांच करानी चाहिए। स्कूलों में सूनसान स्थानों पर सुरक्षा का विशेष व्यवस्था करना चाहिए ताकि कोई बच्चा वहां न जा सके। स्कूल में प्रवेश लेने वाले अभिभावक या अन्य की पूरी तरह से जांच होने के बाद जाने देने की इजाजत हो।

भावना कुलश्रेष्ठ, प्रधानाचार्य विश्वभारती पब्लिक स्कूल

गुड़गांव की घटना बहुत ही दुखद घटना है, हमारे विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है, स्कूल खुलने पर सबसे पहले अध्यापक कक्षाओं में जाते हैं तब बच्चे जाते हैं, स्कूल के सभी स्टॉफ को काउंसलिंग की जाती है, बच्चों के एरिया में किसी भी बाहरी स्टॉफ के घुसने की मनाही है।

एस.पी. शर्मा, आरडब्लूए अध्यक्ष, सेक्टर गामा-एक

जिस तहर से स्कूलों में घटनाएं घट रही हैं तो ऐसे में लोग अपने बच्चों को कहां पढ़ाएं, अभिभावक अपने बच्चों को सुबह स्कूल में इस विश्वास पर छोड़ देता है कि उसके भविष्य के साथ सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है, अगर ऐसे में कोई घटना हो जाती है तो उसकी जवाब देही स्कूल बनती है।


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