महादेव ऐप सट्टेबाजी घोटाले का मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर रायपुर लाया गया, बुधवार को अदालत में होगी पेशी
करोड़ों रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप घोटाले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम मंगलवार को दिल्ली से रायपुर लेकर पहुंची

रायपुर। करोड़ों रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप घोटाले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम मंगलवार को दिल्ली से रायपुर लेकर पहुंची। उसे बुधवार को रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा। करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित सट्टेबाजी नेटवर्क में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहे चंद्राकर को फ्लाइट ई6 2307 से रायपुर लाया गया।
इससे पहले ओमान से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद सोमवार को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 या उससे पहले रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाए।
जांच तेज होने के बाद से चंद्राकर फरार चल रहा था। वह 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। आरोप है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इनमें 'अजंता मेंडिस' के नाम से बना एक कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट भी शामिल था। बाद में वह ओमान चला गया।
ओमान की रॉयल पुलिस ने 8 जुलाई 2026 को उसे गिरफ्तार किया था। भारतीय एजेंसियों, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच औपचारिक प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई की टीम 1 नवंबर को उसे मस्कट से भारत लेकर आई। गिरफ्तारी के 116 दिन बाद उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया।
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 13 एफआईआर सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एजेंसी महादेव बुक ऐप से जुड़े मामलों की जांच कर रही है। इनमें से दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस मामले में समानांतर रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है और चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुका है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चंद्राकर की गिरफ्तारी पर सीबीआई को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी से संरक्षण राशि के लेन-देन को लेकर बड़े खुलासे हो सकते हैं। दिल्ली में सुनवाई के दौरान चंद्राकर के वकील ने सीबीआई की कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दलील दी कि ओमान ने केवल ईडी के मामले में प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी, सीबीआई के मामले में नहीं। वकील ने कहा कि सीबीआई के मामलों में उसके खिलाफ मुकदमा चलाना प्रत्यर्पण की शर्तों का उल्लंघन होगा।
इसके जवाब में सीबीआई के वकील ने कहा कि रायपुर की विशेष अदालत पहले ही चंद्राकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है। ईडी और सीबीआई के मामले आपस में जुड़े हुए हैं और अभियोजन की वैधता से जुड़े सवालों पर फैसला रायपुर की अदालत करेगी। दिल्ली की अदालत के समक्ष केवल ट्रांजिट रिमांड का मामला था।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, चंद्राकर ने रवि उप्पल और अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर कई प्लेटफॉर्म और पैनलों के माध्यम से महादेव सट्टेबाजी नेटवर्क का प्रचार और संचालन किया। आरोप है कि सट्टेबाजी से हासिल रकम विभिन्न बैंक खातों के जरिए एकत्र की जाती थी और फिर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भेजी जाती थी। इस पूरे नेटवर्क का संचालन दुबई से किया जाता था। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ के कई युवाओं को इस नेटवर्क में कर्मचारी और मैनेजर के रूप में काम पर रखा गया था।
ओमान की हिरासत में रहने के दौरान चंद्राकर ने दावा किया था कि भारत की जेल में उसकी जान को खतरा हो सकता है। उसने अपने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी। उसका आरोप था कि सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे धमका रहे हैं। अब सीबीआई उससे पहले पूछताछ करेगी। इसके बाद जुटाए गए सबूतों के आधार पर ईडी भी उससे पूछताछ कर सकती है। प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत आगे की कानूनी कार्यवाही और जांच के दायरे पर रायपुर की विशेष अदालत फैसला करेगी।


