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महाजेनको की गारे पेलमा सेक्टर–2 खदान से कोयले का पहला डिस्पैच शुरू, ऊर्जा में आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा

छत्तीसगढ़ में मौजूदा महाजेनको की गारे पेलमा सेक्टर–2 खदान से कोयले का पहला डिस्पैज औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। इस कोयले का उपयोग महाराष्ट्र में बिजली का उत्पादन करने के लिए किया जाएगा

महाजेनको की गारे पेलमा सेक्टर–2 खदान से कोयले का पहला डिस्पैच शुरू, ऊर्जा में आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
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रायगढ़। छत्तीसगढ़ में मौजूदा महाजेनको की गारे पेलमा सेक्टर–2 खदान से कोयले का पहला डिस्पैज औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। इस कोयले का उपयोग महाराष्ट्र में बिजली का उत्पादन करने के लिए किया जाएगा। इसे देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल ब्लॉक को महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र में विद्युत उत्पादन की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई है। इस परियोजना के माध्यम से महाराष्ट्र की ताप विद्युत परियोजनाओं को छत्तीसगढ़ से सुनिश्चित और स्थिर ईंधन आपूर्ति प्राप्त होगी, जिससे बिजली उत्पादन की निरंतरता और विश्वसनीयता को मजबूती मिलेगी।

गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल माइंस में लगभग 655.15 मिलियन टन कोयला भंडार उपलब्ध है। इसकी अधिकतम वार्षिक उत्पादन क्षमता 23.6 मिलियन टन है। परियोजना के पूर्ण संचालन से छत्तीसगढ़ राज्य को रॉयल्टी, जिला खनिज निधि (डीएमएफ), वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा अन्य मदों के माध्यम से लगभग 29,000 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।

खनन गतिविधियों से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। परियोजना के तहत 3,400 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे, वहीं परिवहन, निर्माण, खानपान, सुरक्षा, ठेकेदारी और अन्य सहायक सेवाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत गति मिलेगी।

महाजेनको के मुताबिक, स्थानीय विकास को प्राथमिकता देते हुए परियोजना क्षेत्र में सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत कार्य किए जा रहे हैं। लगभग 35 करोड़ रुपए की प्रारंभिक सीएसआर योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, आधारभूत संरचना और कौशल विकास से जुड़े कार्य शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही संचालन अवधि के दौरान परियोजना के शुद्ध लाभ का 2 प्रतिशत प्रतिवर्ष स्थानीय विकास कार्यों में निवेश किया जाएगा। परियोजना से प्रभावित 14 गांवों के 1,679 परिवारों के लिए पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना भी प्रभावी रूप से लागू की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी परियोजना में विशेष ध्यान दिया गया है। एक व्यापक पर्यावरण प्रबंधन योजना के अंतर्गत हरित पट्टी का विकास, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण उपाय, जल संरक्षण तथा खनन के पश्चात भूमि सुधार जैसे कार्यों को प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखा जा सके।


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