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छत्तीसगढ़: धमतरी के शीतला शक्तिपीठ की अनूठी मान्यता, पुष्प और चावल गिराकर आशीर्वाद देती हैं मां

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा स्थित प्राचीन स्वयंभू मां शीतला शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर भक्तों की अपार आस्था और श्रद्धा देखने को मिल रही है। इलाके की आराध्य देवी मां शीतला के दरबार में नवरात्र पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंच रहे हैं।

छत्तीसगढ़: धमतरी के शीतला शक्तिपीठ की अनूठी मान्यता, पुष्प और चावल गिराकर आशीर्वाद देती हैं मां
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धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा स्थित प्राचीन स्वयंभू मां शीतला शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर भक्तों की अपार आस्था और श्रद्धा देखने को मिल रही है। इलाके की आराध्य देवी मां शीतला के दरबार में नवरात्र पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंच रहे हैं।

मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा मनोकामना ज्योति (जोत) प्रज्ज्वलित की गई है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रतिदिन श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी भी वितरित की जा रही है।

मां शीतला शक्तिपीठ में दर्शन के लिए केवल धमतरी और आसपास के जिलों से ही नहीं, बल्कि ओडिशा समेत देश के विभिन्न हिस्सों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्त माता के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

श्रद्धालुओं का मानना है कि मां शीतला संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी करने के साथ-साथ भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करती हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार माता अपने सिर से पुष्प गिराकर भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं। सिहावा क्षेत्र के लोग मां शीतला को माता सीता का स्वरूप मानते हैं और विशेष श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं।

संतान सुख की कामना लेकर हर वर्ष हजारों दंपति मां शीतला के दरबार में पहुंचते हैं। इसके अलावा जीवन की समस्याओं के समाधान, परिवार की सुख-समृद्धि और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भक्त माता के चरणों में अपनी अर्जी लगाते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार मां शीतला का प्राकट्य स्वयंभू रूप में हुआ था, जिसके कारण इस शक्तिपीठ का पूरे क्षेत्र में विशेष धार्मिक महत्व है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता के दरबार में पहुंचने से उन्हें आत्मिक शांति, मानसिक सुकून और जीवन की परेशानियों से राहत मिलती है।

नवरात्रि के दौरान मां शीतला शक्तिपीठ श्रद्धा, भक्ति और लोकविश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु माता के जयकारों के बीच दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

श्रद्धालु शैलेंद्र कुमार कौशल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि करीब 22 साल से शीतला शक्तिपीठ में ज्‍योति जलाता रहा हूं। मां भगवती हमारी सारी इच्‍छाओं को पूरा करती हैं। माता शीतला सिहावा गढ़ की देवी हैं। इनकी महिमा इतनी ज्‍यादा है कि कई राज्‍यों से लोग दर्शन के लिए यहां आते हैं और मनोकामना पूरी करने के लिए ज्‍योति जलाते हैं।

मां की लीला अद्भुत है, लोग अपने दुखों को दूर करने के लिए यहां आते हैं। मां की महिमा सुदूर तक फैली है। महाराष्‍ट्र और ओडिशा समेत अन्‍य राज्‍यों से भी लोग आते हैं। मां हर दुखियारे की मनोकामना पूरी करती हैं। विवाह और नौकरी जैसी समस्‍याओं का समाधान माता रानी जरूर करती हैं।

श्रद्धालु तुका राम ने कहा कि पुजारी ज्ञान सागर ने कहा कि लोग अपनी समस्‍या को लेकर यहां आते हैं। दुखियारे जब अपनी समस्‍या बताते हैं तो हम माता रानी से याचना करते हैं कि यह भक्‍त दूर से यहां आपके दर्शन के लिए आया है। इसकी समस्‍या को दूर करनी है। मातारानी अपने मस्‍तक पर चढ़ाया गया सफेद फूल और चावल नीचे गिराकर आशीर्वाद देती हैं। कई ऐसे भक्‍त आए हैं जिनको सन्‍तान नहीं थी, मातारानी ने उनके गोद को भरा है।

ज्योत पुजारी नारायण प्रसाद पाठक ने आईएएनएस से कहा क‍ि मां भगवती शीतला हर गांव में हैं, लेकिन सिहावा की माता स्‍वयंभू हैं। मां की बड़ी कृपा है और श्रद्धा की ज्‍योति है। मां की महिमा है कि वह चावल से आशीर्वाद देती हैं। यहां से कोई खाली हाथ नहीं जाता है। नवरात्र के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का भारी भीड़ हो रही है।


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