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छत्तीसगढ़ : बीजापुर के केरपे में सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम का सफल आयोजन, माओवादियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील

नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के थाना बेदरे क्षेत्र के ग्राम केरपे में सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया

छत्तीसगढ़ : बीजापुर के केरपे में सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम का सफल आयोजन, माओवादियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील
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बीजापुर। नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के थाना बेदरे क्षेत्र के ग्राम केरपे में सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्राम केरपे, मरीमड़गु, पेद्दागुण्डापुर, मादेपुर, ओडरी सहित आसपास के गांवों से लगभग 300 से 400 ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अनुविभागीय अधिकारी पुलिस कुटरू बृज किशोर यादव ने ग्रामीणों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, बच्चों की शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर जागरूक किया। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाकर ग्रामीण अपना और अपने परिवार का भविष्य बेहतर बना सकते हैं।

कार्यक्रम में मुख्यधारा में लौट चुके पूर्व माओवादियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने जंगल के जीवन को कष्टदायक और दुखदाई बताया। पूर्व माओवादियों ने अपने साथियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर परिवार के पास लौट आएं। उन्होंने कहा, "जंगलों में भटकने के बजाय परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन जीकर अपने भविष्य का निर्माण करें। आपके परिजन लंबे समय से आपका इंतजार कर रहे हैं।"

अनुविभागीय अधिकारी पुलिस ने भी सक्रिय माओवादियों से अपील की कि वे बदलते समय के साथ बदलाव को स्वीकार करें और मुख्यधारा में शामिल होकर सामाजिक जीवन अपनाएं। उन्होंने कहा कि हिंसा से न तो व्यक्तिगत विकास होता है और न ही समाज का भला।

कार्यक्रम के दौरान जरूरतमंद ग्रामीणों को आवश्यक सामग्री, स्कूली बच्चों को शिक्षण सामग्री और युवाओं को खेल सामग्री का वितरण किया गया। ग्रामीणों में सकारात्मक उत्साह देखा गया। कई ग्रामीणों ने बच्चों की शिक्षा और क्षेत्र के विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता की शपथ ली। इस अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुटरू की मोबाइल यूनिट द्वारा शिविर लगाकर जरूरतमंदों को चिकित्सीय सुविधाएं मुहैया कराई गईं।

थाना बेदरे प्रभारी ने बताया कि सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास का पुल बन रहा है। ऐसे कार्यक्रम न केवल जागरूकता बढ़ाते हैं बल्कि नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की प्रक्रिया को भी मजबूत करते हैं।


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