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छत्तीसगढ़ : बलौदाबाजार पुलिस की सख्त कार्रवाई, 311 दिन अनधिकृत अनुपस्थित आरक्षक को किया गया बर्खास्त

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में पुलिस विभाग ने अनुशासनहीनता और लंबे समय तक अनधिकृत अनुपस्थिति के आरोप में एक आरक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

छत्तीसगढ़ : बलौदाबाजार पुलिस की सख्त कार्रवाई, 311 दिन अनधिकृत अनुपस्थित आरक्षक को किया गया बर्खास्त
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बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में पुलिस विभाग ने अनुशासनहीनता और लंबे समय तक अनधिकृत अनुपस्थिति के आरोप में एक आरक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने मंगलवार को आरक्षक क्रमांक 215 राहुल शर्मा को 'सेवा से पृथक' करने का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में अनुशासन बनाए रखने और कर्तव्यनिष्ठा सुनिश्चित करने की दिशा में कड़ी कदम मानी जा रही है।

आरक्षक राहुल शर्मा दिनांक 5 अप्रैल 2025 से लगातार बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के अनधिकृत रूप से गैरहाजिर थे। पुलिस की जांच में पाया गया कि वे कुल 311 दिनों तक ड्यूटी पर अनुपस्थित रहे। विभागीय जांच के दौरान उन्हें बार-बार नोटिस जारी किए गए और जांच में उपस्थित होने का पर्याप्त अवसर दिया गया, लेकिन वे जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए। इससे उनकी लापरवाही और अनुशासनहीनता साबित हुई।

आरक्षक की सेवा पुस्तिका के अवलोकन से पता चला कि उनके पूरे सेवाकाल में कुल 14 बार कर्तव्य से गैरहाजिर रहने के मामले दर्ज हैं। यह बार-बार की अनुपस्थिति उनके चरित्र और कर्तव्य के प्रति उदासीनता को दर्शाती है। पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1996 के नियम 10(8) तथा छत्तीसगढ़ पुलिस मैनुअल एवं रेगुलेशन की कंडिका 221(अ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया।

भावना गुप्ता, जो भारतीय पुलिस सेवा (2014 बैच) की अधिकारी हैं, अप्रैल 2025 से बलौदाबाजार-भाटापारा की पुलिस अधीक्षक हैं। इससे पहले वे सूरजपुर, सरगुजा, बेमेतरा और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में एसपी रह चुकी हैं। उनके नेतृत्व में जिले में अनुशासन और कानून-व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हाल ही में पुलिस ने 'समाधान अभियान' के तहत 417 गुम मोबाइल फोन (मूल्य 63 लाख रुपए) बरामद कर जनता का विश्वास जीता था।

यह बर्खास्तगी पुलिस विभाग में अनुशासन की मिसाल है। विभाग का कहना है कि कर्तव्य से गैरहाजिर रहना और जांच में सहयोग न करना गंभीर अनुशासन भंग है, जिस पर सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।


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