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नक्सल मुक्त बस्तर-सुरक्षित छत्तीसगढ़ यही हमारा संकल्प है : सीएम विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके के चार सक्रिय माओवादी कैडरों ने शुक्रवार को सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

नक्सल मुक्त बस्तर-सुरक्षित छत्तीसगढ़ यही हमारा संकल्प है : सीएम विष्णुदेव साय
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके के चार सक्रिय माओवादी कैडरों ने शुक्रवार को सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

इस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अहम आत्मसमर्पण और पुनर्वास प्रयासों के चलते छत्तीसगढ़ माओवादी मुक्त बस्तर की ओर अग्रसर है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एक पोस्ट में कहा, "नक्सल मुक्त बस्तर और सुरक्षित छत्तीसगढ़ हमारा संकल्प है।"

किस्टाराम क्षेत्र में 8 लाख के इनामी 4 सक्रिय माओवादी कैडरों द्वारा हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय बस्तर में बढ़ते विश्वास, सुरक्षा और विकास के वातावरण का स्पष्ट संकेत है। सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयास, सुदृढ़ कैम्प व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी से माओवादी प्रभाव क्षेत्र लगातार सिमट रहा है और उनका आधार कमजोर हो रहा है।

दरअसल, बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सुकमा जिले के किस्टाराम इलाके के चार सक्रिय माओवादी कैडरों ने शुक्रवार को सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

इनमें से प्रत्येक पर 8 लाख रुपए का इनाम था, जो प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) नेटवर्क में उनके दबदबे को दर्शाता है। यह आत्मसमर्पण 2026 की शुरुआत में बस्तर में माओवादी दलबदल की एक व्यापक लहर के बीच हुआ है, जिसमें राज्य की पुनर्वास पहलों के तहत सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिंसा छोड़ दी है।

अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं नक्सली ताकत के कमजोर पड़ने का संकेत हैं, जिसका अंतिम लक्ष्य 31 मार्च तक माओवादी मुक्त छत्तीसगढ़ हासिल करना है।

इन सुरक्षा संबंधी उपलब्धियों के पूरक के रूप में, दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के सुचारू पुनएकीकरण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक सक्रिय पुनर्वास कार्यक्रम शुरू किया है।

इसी बीच, जिला प्रशासन ने भारतीय स्टेट बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से, राजमिस्त्री के काम में आत्मसमर्पण करने वाले 35 युवाओं के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।

कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशन में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य इन व्यक्तियों को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान करना है, जिससे वे समाज में उत्पादक रूप से योगदान दे सकें।

यह प्रशिक्षण क्षेत्र में कुशल निर्माण श्रमिकों की बढ़ती मांग को पूरा करता है। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत है।


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