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सरकार हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है: सीएम नायब सिंह सैनी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार हर खेत तक पर्याप्त सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सरकार हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है: सीएम नायब सिंह सैनी
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चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार हर खेत तक पर्याप्त सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इसके लिए सिंचाई विभाग को किसान समूह बनाकर 10 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि के लिए सामुदायिक तालाब बनाने चाहिए।

मुख्यमंत्री सैनी ने आगे कहा कि इन तालाबों में नहर का पानी भरा जाएगा और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से सिंचाई की जाएगी। सरकार इन तालाबों के निर्माण के लिए 85 प्रतिशत सब्सिडी देगी।

मुख्यमंत्री ने यह बात यहां आयोजित हरियाणा विजन-2047 के तहत सिंचाई और जल संसाधन विभाग की पांच वर्षीय कार्य योजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

उन्होंने आगे कहा कि विभाग को पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों से आगे बढ़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'पर ड्रॉप--मोर क्रॉप' के सिद्धांत के अनुरूप, विकसित देशों के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार योजनाएं बनानी चाहिए, जो सीमित जल संसाधनों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करके '2047 तक विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक हों।

उन्होंने कहा कि सीमित जल संसाधनों के बावजूद उनका अधिकतम उपयोग संभव है और विभागीय योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभाव दिखना चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों को खुले खेतों में सिंचाई कम करने के लिए जागरूक किया जाए।

किसानों के लिए सिंचाई की लागत कम से कम की जाएगी और नई प्रणाली के तहत किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस पहल को प्रारंभ में नौ जिलों - भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा - में लागू किया जाए, जहां किसान समूह गठित किए जाएंगे और 10 एकड़ या उससे अधिक भूमि वाले किसानों के लिए 85 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी के साथ सामुदायिक तालाबों का निर्माण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि नहर की पाइपलाइनों के माध्यम से इन टैंकों में पानी की आपूर्ति की जाएगी और इन पर सौर पैनल लगाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जुड़े हुए खेतों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे किसान आवश्यकतानुसार फसलों की सिंचाई कर सकेंगे।

इससे ट्यूबवेल की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और बिजली और पानी की उपलब्धता पर निर्भरता कम हो जाएगी।

खुले खेतों में सिंचाई बंद कर दी जाएगी, जिससे कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई विभाग इस वर्ष चयनित नौ जिलों में आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों को शामिल करते हुए संपूर्ण ग्रामीण कृषि भूमि को सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों में परिवर्तित करने के लिए निविदाएं जारी कर सकता है।


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