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सामाजिक न्याय योजनाओं को समय पर पहुंचाने पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सहमति

चंडीगढ़ में रविवार को केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का समापन हुआ

सामाजिक न्याय योजनाओं को समय पर पहुंचाने पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सहमति
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में रविवार को केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का समापन हुआ। इस दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचाने के लिए कई ठोस और समयबद्ध सुझावों पर सहमति जताई।

यह चिंतन शिविर 'अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत 2047' विषय पर आयोजित किया गया था। इसका मकसद था कि सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरल, तेज और प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए।

समापन सत्र में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि इस तीन दिवसीय चिंतन शिविर ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक गंभीर और परिणाम-आधारित मंच दिया, जहां सामाजिक न्याय की योजनाओं को और आसान, संवेदनशील और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि इस शिविर में सिर्फ नीतियों की बात नहीं हुई, बल्कि छात्रवृत्ति, नशामुक्ति, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, दिव्यांगजनों के लिए सुविधा, प्रमाण पत्र व्यवस्था और कमजोर वर्गों के लिए सहायता जैसे मुद्दों पर व्यावहारिक समाधान खोजे गए।

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि मंत्रालय की डिजिटल और संस्थागत पहलों, जैसे नई ऑनलाइन सेवाएं और एप, सामाजिक न्याय योजनाओं को तेजी से लोगों तक पहुंचाने में मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि तकनीक के बेहतर उपयोग, प्रक्रिया को आसान बनाने, निगरानी मजबूत करने और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर तालमेल से पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ बिना देरी पहुंचेगा।

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि अलग-अलग विषयों पर हुई चर्चाओं, समूह बैठकों और प्रस्तुतियों से निकले सुझाव सामाजिक न्याय क्षेत्र में योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का मजबूत आधार बनेंगे।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर इन सुझावों को आगे बढ़ाएगा, ताकि गरीब, कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से पहुंच सके।

चिंतन शिविर के तीसरे दिन की शुरुआत योग सत्र से हुई। इसके बाद 'जागरूकता से सुलभता' विषय पर चर्चा हुई, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि योजनाओं को केवल सरकारी योजना के रूप में नहीं, बल्कि लोगों के अधिकार के रूप में देखा जाए।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कहा कि दिव्यांगजनों सहित सभी लोगों के लिए भवन, परिवहन, डिजिटल सेवाएं और सरकारी सुविधाएं आसान और सुलभ बनाना जरूरी है। इसके लिए जागरूकता बढ़ाने, इंजीनियरों और आर्किटेक्ट्स को प्रशिक्षित करने, तकनीक के बेहतर उपयोग और स्थानीय निकायों की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया गया।

चर्चा के दौरान डीएनटी (घुमंतू और अर्ध-घुमंतू) समुदायों को जनगणना 2027 में शामिल करने, सीड योजना को मजबूत करने, पीएम-अजय और अन्य एससी/ओबीसी योजनाओं के तहत रोजगार और सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने, तथा ट्रांसजेंडर लोगों के पुनर्वास के लिए स्माइल-टीजी योजना को प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर भी बात हुई।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने डीएनटी समुदायों के भूमि अधिकार, छात्रवृत्ति वितरण, ट्रांसजेंडर कल्याण, गरिमा गृह, सुरक्षा सेल, कल्याण बोर्ड, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और दिव्यांगजनों के लिए सुलभता से जुड़े अपने सफल मॉडल और अनुभव भी साझा किए, ताकि उन्हें अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सके।


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