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रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब में 'जंगल राज' का आरोप लगाया, एसडीएम पर 'आप' को फायदा पहुंचाने की बात

पंजाब में एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगते हुए विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब में 'जंगल राज' का नया अध्याय बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं

रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब में जंगल राज का आरोप लगाया, एसडीएम पर आप को फायदा पहुंचाने की बात
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चंडीगढ़। पंजाब में एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगते हुए विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब में 'जंगल राज' का नया अध्याय बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि पहले डॉ. गगनदीप सिंह रंधावा को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया, और अब मोगा के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) सागर सेतिया द्वारा बाघापुराना के एसडीएम बबनदीप सिंह पर अत्यधिक दबाव डाला जा रहा है ताकि 'आप' के उम्मीदवारों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया जा सके।

बिट्टू ने सवाल उठाया कि क्या पंजाब के अधिकारी अब सत्ताधारी पार्टी के राजनीतिक हितों के लिए महज औजार बन गए हैं? उन्होंने इसे लोकतंत्र की सरेआम हत्या करार दिया और चेतावनी दी कि यदि किसी अधिकारी को कोई नुकसान पहुंचता है, तो भगवंत मान सरकार सीधे जिम्मेदार होगी। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को पंजाब की रीढ़ बताते हुए मानसिक उत्पीड़न और धमकियां रोकने की मांग की।

इस बीच, बाघापुराना एसडीएम बबनदीप सिंह वालिया ने मुख्य सचिव, पंजाब को एक विस्तृत शिकायत पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने बताया कि बाघापुराना पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव 17 मार्च 2026 को निर्धारित थे, लेकिन कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति के कारण चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

इसकी जानकारी समय रहते डीसी मोगा को दे दी गई थी। हालांकि, चुनाव न होने के बाद से डीसी सागर सेतिया द्वारा उन्हें लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। बार-बार बैठकों के लिए बुलाया जा रहा है, देर रात फोन कॉल्स किए जा रहे हैं, यहां तक कि स्वीकृत अवकाश के दिनों में भी। दबाव इतना बढ़ गया कि कई बार फोन बंद करना पड़ा। एसडीएम का आरोप है कि यह दबाव किसी विशेष उम्मीदवार (आप से जुड़े) के पक्ष में चुनाव परिणाम घोषित करवाने के लिए है, जो निष्पक्ष चुनाव और प्रशासनिक नैतिकता के खिलाफ है।

पत्र में आगे कहा गया है कि धमकी भरे संदेश और कॉल्स मिले हैं, जिसमें व्यक्तिगत सुरक्षा और जीवन को खतरा बताया गया। कुछ अन्य अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर विजिलेंस चैनलों के जरिए अनुशासनात्मक कार्रवाई, जांच और एफआईआर की धमकियां दी जा रही हैं। इन सबके कारण गंभीर मानसिक तनाव और भावनात्मक कष्ट हो रहा है, और परिवार और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।

एसडीएम ने मुख्य सचिव से पूरी घटना की निष्पक्ष जांच हो की मांग की है।


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