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जाखड़ का हमला: भाजपा को डिगा नहीं सकतीं डरपोक ताकतें

पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा है कि भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से डरी हुई ताकतों द्वारा पार्टी कार्यालय पर किए गए हमले जैसी कायराना हरकतें "नया पंजाब" बनाने के पार्टी के संकल्प को हिला नहीं सकतीं

जाखड़ का हमला: भाजपा को डिगा नहीं सकतीं डरपोक ताकतें
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पंजाब भाजपा अध्यक्ष बोले- ‘नया पंजाब’ बनाने का संकल्प अटूट

  • नशा और गैंगस्टरवाद पर निशाना, दो साल में खत्म करने का वादा
  • कांग्रेस पर आरोप, आप सरकार के सामने आत्मसमर्पण किया

चंडीगढ़। पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा है कि भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से डरी हुई ताकतों द्वारा पार्टी कार्यालय पर किए गए हमले जैसी कायराना हरकतें "नया पंजाब" बनाने के पार्टी के संकल्प को हिला नहीं सकतीं।

श्री जाखड़ ने सोमवार को पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।। ।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की प्रेरणा से पार्टी 'नया पंजाब' के दृष्टिकोण पर काम कर रही है। आज पंजाब में नशा और गैंगस्टरवाद सबसे बड़ी चुनौतियां बन गए हैं। परिवार तब तक डर में रहते हैं जब तक उनके प्रियजन सुरक्षित घर नहीं लौट आते। उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ कई अभियानों के बावजूद परिणाम शून्य हैं।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की उस प्रतिबद्धता को दोहराया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो दो साल के भीतर नशाखोरी को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा। श्री जाखड़ ने कहा कि कांग्रेस ने प्रभावी रूप से आप सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि फसल नुकसान के मुद्दे पर कांग्रेस नेता पंजाब सरकार को जवाबदेह क्यों नहीं ठहरा रहे हैं, जबकि आपदा राहत कोष में 13,000 करोड़ रूपये उपलब्ध हैं।

पार्टी कार्यालय पर हुए हमले और अन्य मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस सक्षम है लेकिन उसके पास नेतृत्व की कमी है। उन्होंने गगनदीप रंधावा मामले में सीबीआई जांच की मांग की।

इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब सरकार ने बेअदबी पर कानून लाने में बहुत देरी की है। उन्होंने पुरजोर मांग की कि इस कानून में उन लोगों के लिए भी सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए जो मंदिरों में 'प्राण प्रतिष्ठित' मूर्तियों का अपमान या अनादर करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आस्था के सम्मान में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा, सांसद सतनाम सिंह और प्रदेश महासचिव परमिंदर बराड़ भी उपस्थित थे।


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