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सुप्रीम कोर्ट में फंसी सीबीआई

केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई भारत सरकार की प्रमुख जाँच एजेन्सी है. देश में होने वाले कई मामलों की जांच का जिम्मा इस एजेंसी को दिया जाता है. लेकिन कुछ समय से सीबीआई जांच पर सवाल खड़े होने लगे हैं. खासतौर पर उन मामलों में जहां सत्तापक्ष से जुड़े हुए लोगों की जांच उसके हाथों में हो. और अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई पर शिकंजा कस दिया है.

सुप्रीम कोर्ट में फंसी सीबीआई
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सीबीआई एक बार फिर सवालों में हैं. और इस बार सवाल उठाए हैं खुद सुप्रीम कोर्ट ने. कोर्ट ने सीबीआई जांच को लेकर उससे सवाल किया है कि वो बताए कि उसकी जांच का रिजेल्ट क्या है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के जो मुकदमे चल रहे हैं उन मामलों में हो रही देरी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अदालती मामलों में एजेंसी की सक्सेस रेट पर डेटा मांगा है। दावा किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट सीबीआई के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर सकता है। दरअसल, एक मामले में सीबीआई ने 542 दिनों की देरी के बाद अपील दायर की थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई और उसने केंद्रीय एजेंसी के कामकाज और उसके परफॉर्मेन्स का विश्लेषण करने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक को निर्देश दिया है कि वह उन मामलों की संख्या को कोर्ट के सामने रखें, जिनमें एजेंसी ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्टों में अभियुक्तों को दोषी ठहराने में सफल रही। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि सीबीआई निदेशक कानूनी कार्यवाही के संबंध में विभाग को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं? जस्टिस संजय किशन कौल और एमएम सुंदरेश की बेंच ने कहा कि सीबीआई की कुछ जवाबदेही होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि एजेंसी के लिए केवल मामला दर्ज करना और जांच करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि अभियोजन सफलतापूर्वक किया जाए। पीठ ने सीबीआई से अभी निपटाए जा रहे केसों और सफलतापूर्वक पूरे किए गए मामलों का पूरा विवरण मांगा है। सीबीआई को यह भी ब्योरा देने के लिए कहा गया है कि अदालतों में कितने मामले लंबित हैं और कितने समय से हैं।


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