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सरकार ने डीजल और एटीएफ के निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, पेट्रोल पर दी राहत!

केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स को बढ़ा दिया है। वहीं, पेट्रोल पर कटौती की है। इसकी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आना था। नई दरें गुरुवार से लागू हो गई हैं।

सरकार ने डीजल और एटीएफ के निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, पेट्रोल पर दी राहत!
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स को बढ़ा दिया है। वहीं, पेट्रोल पर कटौती की है। इसकी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आना था। नई दरें गुरुवार से लागू हो गई हैं।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि डीजल पर निर्यात शुल्क बढ़कर 15.5 रुपए प्रति लीटर हो गया है, जो कि पहले 8.5 रुपए प्रति लीटर था। एटीएफ पर निर्यात शुल्क 7.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 14.5 रुपए प्रति लीटर हो गया।

इसके अलावा, सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क को 4 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया है।

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया है और बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।

मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सभी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है, जिसके जवाब में ईरान ने इलाके में अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर जवाबी हमले किए।

इस महीने की शुरुआत में, सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया था। इसके तहत पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ाया गया, जबकि डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क में कटौती की गई।

इस दौरान पेट्रोल निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (एसएईडी) को 1.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 4 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया। साथ ही, डीजल पर निर्यात शुल्क को 14 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया, जबकि एटीएफ पर निर्यात शुल्क को 12.5 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 7.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया।

सरकार घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स की समय-समय पर समीक्षा करती है ताकि शुल्क को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में होने वाले बदलावों के हिसाब से समायोजित किया जा सके।



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