Top
Begin typing your search above and press return to search.

क्यों बिखर रहा है जर्मनी के युवा इंजीनियरों का सपना

जर्मनी में युवा इंजीनियरों की लगातार खारिज हो रही नौकरी की अर्जियां उनके सपने तोड़ रही हैं. कभी एक अर्जी पर जहां नौकरियों के बुलावे आ जाते थे वहां 50 अर्जियों पर भी अब कोई कंपनी घास नहीं डाल रही है

क्यों बिखर रहा है जर्मनी के युवा इंजीनियरों का सपना
X

जर्मनी में युवा इंजीनियरों की लगातार खारिज हो रही नौकरी की अर्जियां उनके सपने तोड़ रही हैं. कभी एक अर्जी पर जहां नौकरियों के बुलावे आ जाते थे वहां 50 अर्जियों पर भी अब कोई कंपनी घास नहीं डाल रही है.

एक साल तक नौकरी खोजने, बड़े ऑटोमोटिव सप्लायरों के यहां काम करने और लगभग 50 अर्जियां भेजने के बावजूद जर्मन सॉफ्टवेयर इंजीनयर माक्स पेइल अब भी नौकरी ढूंढ ही रहे हैं. ऑटोनॉमस एंड इंटेलिजेंट ट्राइविंग का अहम हिस्सा माने जाने वाले कंप्युटर विजन में दक्ष होने के बाद पेइल को लगा था कि जर्मनी की दिग्गज कंपनियों में उन्हें आसानी भूमिका मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कई साल से विकास के ठहरे पहियों ने और चीन की ओर से मिल रही प्रतिस्पर्धा पेइल जैसे युवा इंजीनियरों का रास्ता रोक रही है. जर्मन शहर फ्रैंकफर्ट में लगभग 30 साल की उम्र के पेइल ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा,"आमतौर पर हमें सीधे इनकार ही मिल रहा है. मेरा सिर्फ एक इंटरव्यू हुआ. यही हाल मेरे दोस्तों का है, एक ने तो 60 जगह अप्लाई किया था."

खत्म हुआ 'स्वर्ण युग'

धारदार तकनीक और प्रगतिशील डिजाइनों के लिए विख्यात जर्मनी का कार उद्योग पूरी दुनिया में बेहतरीन कारों का निर्यात करता रहा है. बीते कुछ सालों में ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे देशों जैसी कारों की बिक्री में गिरावट आने को तो जर्मनी ने रोक तो लिया लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है. चीनी कार कंपनियां बीवाईडी और एक्सपेंग ने जर्मन कारों की बिक्री में बड़ी सेंध लगाई है. इसकी वजह से जर्मन कंपनियों को बड़े बदलाव करने पड़ रहे हैं.

कोलोन के आईडब्ल्यू इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट के ट्रांसपोर्ट इकोनॉमिस्ट थॉमस पुल्स ने एएफपी से कहा, "10 साल पहले हम एक साल में 60 लाख कारें बनाते थे और अब हम लगभग 42 लाख पर टिके हुए हैं. यह दूसरे यूरोपीय देशों की तुलना में बढ़िया है लेकिन हमें यह मानना होगा कि अब वह स्वर्ण युग लौटेगा नहीं."

बदले वक्त की एक निशानी बीते गुरुवार को जर्मन कार कंपनी फॉल्क्सवागेन से जुड़े देश भर के ठिकानों पर दिखी जहां कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. ऐसी खबरें हैं कि जर्मनी की सबसे बड़ी कार कंपनी एक लाख नौकरियां खत्म करने की तैयारी में है. जर्मनी के संघीय रोजगार कार्यालय एफईए के आंकड़ों के मुताबिक 2021 से 2025 तक के पांच सालों में जर्मन कार उद्योग में नौकरियों की कुल संख्या 8 फीसदी तक घट चुकी है जबकि इसी अवधि में कुल रोजगार कुल मिला कर करीब 1 फीसदी बढ़ा है.

"चाइना शॉक 2.0"

कुल मिला कर जर्मन उद्योग जिस परिस्थिति का सामना कर रहा है उसे "चाइना शॉक 2.0" कहा जा रहा है. यह हालत इसलिए है क्योंकि चीन ने सस्ते उत्पादन की ओर से हटा कर अपना ध्यान उच्च तकनीक वाले सामानों पर लगाया है. ये उच्च तकनीक वाले सामान अकसर काफी कम कीमतों पर बाजार में उतर रहे हैं.

इसकी वजह से कभी भरोसेमंद रहा निर्यात बाजार जर्मन कंपनियों को वहां से बाहर धकेल रहा है. पिछले साल जर्मन निर्यात लगभग 1.56 खरब यूरो का रहा. साख्यिकी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक यह 2022 की शीर्ष स्थिति से करीब 2 फीसदी कम है. इसी अवधि में जर्मनी से चीन को निर्यात लगभग 25 फीसदी घट कर 81.3 अरब यूरोप पर आ गया.

पेइल ने पिछले साल ही टायर मेकर कॉन्टिनेंटल में अपनी ट्रेनिंग पूरी की. ऑटोमोटिव उनके पूरी तरह उतरने से पहले ही पहिया घूम गया है जिसका नतीजा है कि उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है. उन्होंने एएफपी से कहा, "जब मैंने शुरू किया तब भी आप देख सकते हैं कि हमेशा इस खबर के बारे में पढ़ने को मिल रहा था कि यह या वह कारोबार का हिस्सा है जिसमें फेरबदल हो रहा है. उसके बाद जब आप देखते हैं कि आपके अनुभवी सहकर्मी जा रहे हैं तो आप समझ जाते हैं कि आपको भूमिका मिलने के आसार नहीं हैं."

गड़बड़ कहां है

आन्या रॉबर्ट 20 साल तक जर्मनी के प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों में करियर सर्विस की जिम्मेदारी संभालती आई हैं. उन्होंने एएफपी को बताया कि कुछ बेहतरीन छात्रों को भी अब नौकरी ढूंढने में मेहनत करनी पड़ रही है.

आरडब्ल्यूटीएच आखेन की करियर सर्विस की प्रमुख आन्या रॉबर्ट ने कहा, "ऐसे भी लोग हैं जो हमारे पास आकर कहते हैं, 'मैंने 30 अर्जियां लिखी हैं और शायद ही किसी ने जवाब दिया हैः समस्या क्या है?'" उन्होंने यह भी कहा, "अब ऐसे हालात नहीं हैं कि आपने बीएमडब्ल्यू को अर्जी भेजी और आपको नौकरी मिल गई."

एफईए के आंकड़ों के मुताबिक जर्मनी में पिछले साल क्वालिफाइड इंजीनियरों में बेरोजगारी की दर 3.8 फीसदी थी. 2022 की तुलना में यह लगभग 50 फीसदी ज्यादा है. एलेक्ट्रिकल इंजीनियर लूका लिन्हसेन उन भाग्यशाली लोगों में हैं जिन्हें इस महीने हैम्बर्ग में सॉफ्टवेयर कंसल्टेंट की नौकरी मिल गई. हालांकि एक महीने तक बहुत थकाने वाली नौकरी ढूंढने की प्रक्रिया के बाद यह दिन आया.

उन्होंने एएफपी से कहा, "इंजीनियर के रूप में हमारी पढ़ाई की शुरुआत में समझाया गया था कि व्यवहारिक रूप से पढ़ाई खत्म करने के पहले हमारे पास नौकरी होगी. अगर आप इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं तो इसलिए करिए क्योंकि आपका तकनीक में मन लगता है. नौकरी या पैसा कमाने के लिए यह मत करिए."


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it