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ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच कहां करें निवेश? यूबीएस ने दी बड़ी सलाह

पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण पिछले कुछ दिनों से वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशक सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं

ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच कहां करें निवेश? यूबीएस ने दी बड़ी सलाह
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण पिछले कुछ दिनों से वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशक सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा जिस होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से होकर गुजरता है, वह लगातार चौथे दिन भी प्रभावी रूप से बंद रहा।

हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र के हवाई मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। दुबई और दोहा के प्रमुख हवाईअड्डों पर सप्ताहांत में परिचालन रोक दिया गया था। अमीरात, एतिहाद एयरवेज और कतर एयरवेज ने भी अधिकांश उड़ानें स्थगित कर दीं।

विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

वहीं, वैश्विक निवेश बैंक यूबीएस का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट केवल अस्थायी रहेगी। जैसे ही यह स्पष्ट होगा कि आपूर्ति बाधा अस्थायी है और महत्वपूर्ण तेल ढांचा नष्ट नहीं हुआ है, तेल की कीमतों में शुरुआती उछाल आंशिक रूप से वापस आ सकती है।

यूबीएस ग्लोबल वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य निवेश अधिकारी मार्क हेफेले ने एक नोट में लिखा कि आने वाले हफ्तों में बाजार में अस्थिरता रह सकती है, लेकिन बाद में निवेशक फिर से वैश्विक अर्थव्यवस्था के सकारात्मक बुनियादी कारकों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उनका कहना है कि इतिहास में ज्यादातर भू-राजनीतिक झटकों का असर सीमित समय के लिए ही रहा है।

यूबीएस के अनुसार, ऐसे समय में घबराकर पोर्टफोलियो से जोखिम घटाने का फैसला आमतौर पर लाभदायक नहीं रहा है। बैंक की सलाह है कि निवेशक लंबी अवधि का नजरिया बनाए रखें, व्यापक इक्विटी इंडेक्स में निवेशित रहें और बाजार में गिरावट के दौरान अपने पोर्टफोलियो को और विविधतापूर्ण बनाएं।

हालांकि सैन्य तनाव के शुरुआती दौर में शेयर बाजार दबाव में रह सकता है, लेकिन यूबीएस का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती, कंपनियों की मजबूत कमाई और वैश्विक स्तर पर सरकारी खर्च में बढ़ोतरी के कारण 2026 के अंत तक बाजार में मौजूदा स्तर से लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़त की संभावना है।

बैंक को अमेरिका के साथ-साथ यूरोप, जापान, चीन और उभरते बाजारों में भी आगे बढ़त की उम्मीद है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन (खासकर टेक सेक्टर), भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान को अगले उछाल का प्रमुख चालक माना गया है।

यूबीएस को 2026 में कमोडिटी बाजार, खासकर कीमती धातुओं में, और तेजी की उम्मीद है। पश्चिम एशिया की तेजी से बदलती परिस्थितियों को देखते हुए बैंक का मानना है कि सक्रिय रूप से प्रबंधित कमोडिटी रणनीतियां ज्यादा फायदेमंद हो सकती हैं।

बैंक ने सलाह दी है कि कुल संपत्ति का एक छोटा हिस्सा (लगभग कुछ प्रतिशत) सोने में निवेश करना पोर्टफोलियो को विविधता देने और भू-राजनीतिक जोखिम से बचाव में मदद कर सकता है। इसके अलावा, गुणवत्तापूर्ण फिक्स्ड इनकम और हेज फंड जैसे विकल्प पोर्टफोलियो की अस्थिरता कम करने में सहायक हो सकते हैं।

यूबीएस के मुताबिक, अगर तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ती है तो बड़े केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि हाल के वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने एकबारगी महंगाई बढ़ोतरी पर ज्यादा प्रतिक्रिया न देने का संकेत दिया है।

बैंक का मानना है कि ऊंची तेल कीमतें उपभोक्ताओं और कंपनियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ डालती हैं, जो कर वृद्धि जैसा असर डाल सकती हैं। हालांकि तेल बाजार आमतौर पर खुद को संतुलित कर लेते हैं, क्योंकि कीमतें बढ़ने पर आपूर्ति भी बढ़ती है। इसलिए यूबीएस को नहीं लगता कि तेल की कीमतों में अस्थायी उछाल से आर्थिक विकास पर लंबे समय तक असर पड़ेगा।

फिर भी अगर ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहीं, तो तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर इसका नकारात्मक प्रभाव दिख सकता है, हालांकि यह असर सीमित है और कुछ वर्षों में कम हो सकता है।


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