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लगातार तेजी के बाद फिसला बाजार, सेंसेक्स 893 अंक गिरा; आईटी, मेटल और पीएसयू बैंक के शेयरों में भारी गिरावट

लगातार तेजी के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। मेटल, आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में भारी बिकवाली और एशियाई बाजारों में कमजोरी तथा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में 1.1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट का असर घरेलू शेयर बाजारों पर भी पड़ा।

लगातार तेजी के बाद फिसला बाजार, सेंसेक्स 893 अंक गिरा; आईटी, मेटल और पीएसयू बैंक के शेयरों में भारी गिरावट
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मुंबई। लगातार तेजी के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। मेटल, आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में भारी बिकवाली और एशियाई बाजारों में कमजोरी तथा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में 1.1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट का असर घरेलू शेयर बाजारों पर भी पड़ा।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 893.39 अंक यानी 1.16 प्रतिशत गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 278.80 अंक या 1.16 प्रतिशत गिरकर 23,824.10 पर पहुंच गया।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 1.05 प्रतिशत और 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

वहीं, सेक्टरवार देखें, तो निफ्टी मेटल में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और यह अपने समकक्षों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया। निफ्टी आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा, वहीं निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर ने बेहतर प्रदर्शन किया।

निफ्टी50 इंडेक्स में इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस और जेएसडब्ल्यू स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनियां रहीं। इसके अलावा, टाटा स्टील, हिंडाल्को, बीईएल और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में 2 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

मंगलवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार को सबसे बड़ा झटका साउथ कोरिया के बाजार से आया, जहां का प्रमुख सूचकांक कोस्पी 10 प्रतिशत तक गिर गया, जिसके बाद एक्सचेंज को 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। यह कदम निवेशकों की घबराहट और तेज बिकवाली को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया। ट्रेडिंग दोबारा शुरू होने के बाद भी कोस्पी की गिरावट बढ़कर 9 प्रतिशत से ज्यादा हो गई।

इसके अलावा, जापान का निक्केई 225 करीब 3.2 प्रतिशत गिर गया, चीन का शंघाई कम्पोजिट 2 प्रतिशत तक फिसल गया और हांगकांग का हैंग सेंग भी करीब 2 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिखा। दूसरी तरफ, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है, और सोमवार को एफआईआई ने करीब 635.91 करोड़ रुपए के शेयर बेच दिए। डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू भी 6 पैसे गिरकर 94.69 के स्तर पर आ गई। इन सभी वजहों से घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ गया और अंतिम समय में गिरावट और बढ़ गई।

एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि ग्लोबल स्तर पर नकारात्मक संकेतों और सावधानी के माहौल के बीच, शुरुआती बढ़त टिक नहीं पाई और मार्केट सेंटीमेंट कमजोर हो गया। हालिया तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग के चलते गिरावट का दबाव और बढ़ गया, जिससे प्रमुख सेक्टरों में व्यापक कमजोरी देखी गई।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि ग्लोबल स्तर पर कीमतों में गिरावट और अनिश्चित माहौल के बीच मांग को लेकर चिंताओं की वजह से मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। घरेलू आईटी सेक्टर पर भी दबाव बना रहा; जिसकी वजह ग्लोबल टेक सेक्टर में गिरावट और भारतीय आईटी स्पेस में एआई से होने वाले बदलावों को लेकर लगातार बनी चिंताएं रहीं।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि हालांकि कच्चे तेल की स्थिर कीमतों और जियोपॉलिटिकल तनाव में कमी से कुछ राहत मिली, लेकिन निवेशकों ने सावधानी का रुख बनाए रखा और मॉनसून की प्रगति तथा अमेरिका-भारत के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत पर ध्यान केंद्रित किया।



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