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सेबी ने एफपीआई ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया आसान की, कस्टोडियन को डिजिटल हस्ताक्षर वाले पावर ऑफ अटॉर्नी की अनुमति दी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया को आसान करते हुए उन्हें अपने कस्टोडियन को डिजिटल हस्ताक्षर वाला पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) जमा करने की अनुमति दे दी।

सेबी ने एफपीआई ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया आसान की, कस्टोडियन को डिजिटल हस्ताक्षर वाले पावर ऑफ अटॉर्नी की अनुमति दी
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नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने गुरुवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया को आसान करते हुए उन्हें अपने कस्टोडियन को डिजिटल हस्ताक्षर वाला पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) जमा करने की अनुमति दे दी।

सेबी ने कहा कि संशोधित व्यवस्था के तहत एफपीआई अपने कस्टोडियन को उसका पता निर्दिष्ट करते हुए पीओए जारी कर सकता है और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अनुसार डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए इस दस्तावेज को निष्पादित कर सकता है।

बाजार नियामक ने कहा, "सेबी के लगातार जारी डिजिटलीकरण प्रयासों के तहत अब एफपीआई को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अनुसार डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) निष्पादित करने की अनुमति दी गई है।"

पीओए एफपीआई के कस्टोडियन को उसकी ओर से कार्य करने का अधिकार देता है। कस्टोडियन वे वित्तीय संस्थान होते हैं जो निवेशकों की प्रतिभूतियों और परिसंपत्तियों को अपने पास रखते और उनका प्रबंधन करते हैं। वे एफपीआई पंजीकरण की प्रक्रिया, ट्रेड के क्लियरेंस, सेटलमेंट के प्रबंधन और नियामकों को अनुपालन संबंधी रिपोर्टिंग जैसे कार्य भी करते हैं।

सेबी ने कहा कि डिजिटल हस्ताक्षर वाले पीओए से ऑनबोर्डिंग में लगने वाला समय काफी कम होने की उम्मीद है, क्योंकि इससे पीओए के नोटरीकरण, एपोस्टिलेशन या कांसुलरीकरण की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

सेबी ने कहा कि संशोधित प्रक्रिया के तहत पीओए के नोटरीकरण, एपोस्टिलेशन या कांसुलरीकरण की जरूरत नहीं होगी। इससे एफपीआई के ऑनबोर्डिंग में लगने वाला समय कम होने और विदेशी निवेशकों के लिए कारोबार करना और आसान होने की उम्मीद है।

पूंजी बाजार नियामक ने कहा कि यह कदम एफपीआई ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को लगातार डिजिटल और सरल बनाने के उसके प्रयासों का हिस्सा है।

पिछले कुछ वर्षों में सेबी ने पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें एफपीआई पंजीकरण, पैन, बैंक और डीमैट खातों के लिए कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म (सीएएफ) शामिल है। इसके अलावा, सीएएफ और अन्य पंजीकरण दस्तावेजों को निष्पादित करने के लिए भारतीय डिजिटल हस्ताक्षर के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। सीएएफ पोर्टल के भीतर डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा शुरू की गई है और स्कैन की गई प्रतियों के आधार पर पंजीकरण की अनुमति भी दी गई है।

सेबी ने कहा कि नए प्रावधान 20 अगस्त 2026 से प्रभावी होंगे।


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