रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर: पहली बार 95 प्रति डॉलर के पार, शेयर बाजार में भी भारी दबाव
सोमवार की शुरुआत में रुपया मजबूत दिख रहा था। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में यह 93.62 पर खुला और कुछ समय के लिए 93.57 तक पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर से करीब 128 पैसे की मजबूती थी।

नई दिल्ली: Rupee at Historic Low: भारतीय रुपये ने सोमवार को विदेशी मुद्रा बाजार में एक नया निचला स्तर छू लिया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 के स्तर को पार कर गया, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया है। दिनभर के कारोबार में रुपये में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंततः यह भारी गिरावट के साथ बंद हुआ।
दिनभर में बड़ा उतार-चढ़ाव
सोमवार की शुरुआत में रुपया मजबूत दिख रहा था। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में यह 93.62 पर खुला और कुछ समय के लिए 93.57 तक पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर से करीब 128 पैसे की मजबूती थी। हालांकि, दोपहर बाद बाजार की दिशा अचानक बदल गई। डॉलर की मांग बढ़ने और बाहरी दबावों के चलते रुपया तेजी से फिसलता चला गया। दोपहर करीब 3:20 बजे यह 95.157 के स्तर पर कारोबार कर रहा था और सत्र के दौरान 95.58 तक गिर गया—जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इस तरह दिन के उच्चतम स्तर से रुपये में करीब 2.33 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
लगातार कमजोर होता रुपया
आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में ही रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 12 रुपये तक कमजोर हो चुका है। शुक्रवार को भी रुपया 94.85 के स्तर पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था। लेकिन सोमवार को यह रिकॉर्ड भी टूट गया। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
RBI के कदम भी नहीं रोक पाए गिरावट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की विदेशी मुद्रा पोजिशन पर सख्ती जैसे कदम उठाए, लेकिन इससे रुपये को सीमित राहत ही मिल पाई। विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक और घरेलू आर्थिक हालात ऐसे हैं, जिनमें केवल केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखना मुश्किल है।
गिरावट की प्रमुख वजहें क्या हैं?
1. मजबूत डॉलर इंडेक्स
डॉलर इंडेक्स 100 के स्तर से ऊपर बना हुआ है, जो वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा की मजबूती को दर्शाता है। निवेशक अनिश्चितता के समय डॉलर को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, जिससे उसकी मांग बढ़ जाती है।
2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति रुपये पर अतिरिक्त दबाव डालती है, क्योंकि अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।
3. भू-राजनीतिक तनाव
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने तेल बाजार में उथल-पुथल बढ़ा दी है, जिसका असर सीधे भारतीय मुद्रा पर पड़ रहा है।
4. विदेशी निवेश की निकासी
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में उन्होंने एक ही दिन में 4,367 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे, जिससे बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ा।
शेयर बाजार भी धराशायी
रुपये की गिरावट का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स 1,733.78 अंक गिरकर 71,849.44 पर बंद हुआ। निफ्टी 528.45 अंक गिरकर 22,291.15 पर पहुंच गया। निफ्टी में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई, और यह मार्च 2020 के बाद की सबसे खराब मासिक गिरावट की ओर बढ़ता दिख रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
फॉरेक्स विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल रुपये के लिए हालात आसान नहीं हैं। उनके अनुसार, जब तक वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम नहीं होती, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती और विदेशी निवेश वापस नहीं आता, तब तक रुपये में स्थिरता की उम्मीद कम है। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा, तो रुपया आगे और कमजोर हो सकता है।
मौजूदा परिस्थितियों में बाजार की नजरें तीन प्रमुख कारकों पर टिकी हैं—
वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति
कच्चे तेल की कीमतें
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां
यदि इनमें सुधार होता है, तो रुपये को कुछ राहत मिल सकती है। अन्यथा, निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रह सकती है।
दबाव में रुपया, बढ़ी चिंता
भारतीय रुपये का 95 प्रति डॉलर के पार जाना एक महत्वपूर्ण संकेत है कि वैश्विक और घरेलू आर्थिक दबाव किस हद तक बढ़ चुके हैं। हालांकि, RBI और सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन मौजूदा हालात में रुपये और बाजार दोनों के लिए चुनौतियां कम होती नहीं दिख रहीं। आने वाले दिनों में निवेशकों और नीति निर्माताओं की रणनीति ही तय करेगी कि यह दबाव कब और कैसे कम होता है।


