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आरबीआई ने शहरी को-ऑपरेटिव बैंकों को मजबूत बनाने के लिए लॉन्च किया 'मिशन सक्षम'

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शहरी को-ऑपरेटिव बैंकों यानी सहकारी बैंकिंग (यूसीबी) सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए 'मिशन सक्षम' (सहकारी बैंक क्षमता निर्माण) की शुरुआत की है

आरबीआई ने शहरी को-ऑपरेटिव बैंकों को मजबूत बनाने के लिए लॉन्च किया मिशन सक्षम
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को शहरी को-ऑपरेटिव बैंकों यानी सहकारी बैंकिंग (यूसीबी) सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए 'मिशन सक्षम' (सहकारी बैंक क्षमता निर्माण) की शुरुआत की है। यह पूरे देश में लागू होने वाला एक प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य को-ऑपरेटिव बैंकों की कार्यक्षमता और प्रबंधन को बेहतर बनाना है।

केंद्रीय बैंक ने एक नोट में बताया कि आरबीआई द्वारा शुरू किए गए इस मिशन के तहत करीब 1.40 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें बैंक के बोर्ड मेंबर्स, सीनियर मैनेजमेंट, रिस्क, कंप्लायंस और ऑडिट विभाग के प्रमुखों के साथ-साथ आईटी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा।

यह ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑफलाइन (इन-पर्सन) और ऑनलाइन (ई-लर्निंग) दोनों माध्यमों से आयोजित किए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई जा सके।

'सक्षम' का मतलब है—काबिल और सक्षम बनाना। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराए जाएं, ताकि अलग-अलग राज्यों के कर्मचारियों को समझने में आसानी हो।

इस मिशन को तैयार करने में यूसीबी सेक्टर की अंब्रेला संस्था और राष्ट्रीय/राज्य सहकारी संघों से भी सलाह ली गई है।

आरबीआई का मानना है कि इस पहल से सहकारी बैंकों की मैनेजमेंट क्षमता और ऑपरेशनल दक्षता में सुधार होगा। साथ ही, नियमों के पालन की संस्कृति मजबूत होगी और बैंकों की संस्थागत मजबूती भी बढ़ेगी।

नोट में कहा है कि यह मिशन एक ऐसा सिस्टम तैयार करने की दिशा में काम करेगा, जहां लगातार सीखने और सुधार की प्रक्रिया बनी रहे।

'मिशन सक्षम' के जरिए आरबीआई का लक्ष्य सिर्फ ट्रेनिंग देना ही नहीं, बल्कि एक स्थायी और मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है, जिससे पूरे यूसीबी सेक्टर की स्थिरता और विकास को गति मिले।

केंद्रीय बैंक का कहना है कि यह पहल सहकारी बैंकों के भविष्य को और सुरक्षित और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।


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