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प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में वैश्विक चिप नेतृत्व के लिए भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों पर दिया गया जोर: उद्योग जगत

उद्योग विशेषज्ञों ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 80वें स्वतंत्रता दिवस भाषण में भारत द्वारा सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विस्तार करने पर जोर देना, पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण से वैश्विक नेतृत्व की ओर एक बदलाव का संकेत है।

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में वैश्विक चिप नेतृत्व के लिए भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों पर दिया गया जोर: उद्योग जगत
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नई दिल्ली। उद्योग विशेषज्ञों ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 80वें स्वतंत्रता दिवस भाषण में भारत द्वारा सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विस्तार करने पर जोर देना, पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण से वैश्विक नेतृत्व की ओर एक बदलाव का संकेत है।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अगले 7 से 8 वर्षों के भीतर 5 से 8 और उन्नत चिप संयंत्र स्थापित करने के लिए उल्लिखित महत्वाकांक्षी रोडमैप की सराहना की।

इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) तथा एसईएमआई इंडिया के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार भारत को चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और उन्नत मोबाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि देश में स्थापित तीन बड़े सेमीकंडक्टर संयंत्रों ने परिचालन शुरू कर दिया है और वहां निर्मित चिप्स वैश्विक बाजारों में निर्यात भी किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में पिछले 12 वर्षों के दौरान मोबाइल फोन विनिर्माण 33 गुना बढ़ा है, जबकि व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र का आकार 7 गुना बढ़ चुका है। इससे भारत वैश्विक हार्डवेयर निर्माण और नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि देश चिप फैब्रिकेशन इकाइयों, एआई डेटा सेंटरों और उच्च क्षमता वाले डिजिटल बुनियादी ढांचे की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 200 गीगावाट स्वच्छ परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने की दिशा में अग्रसर है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए स्थिर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है और यह पहल भारत की दीर्घकालिक तकनीकी रणनीति को मजबूती देगी।

अशोक चंदक ने कहा, "भारत अब केवल डिजिटल और हार्डवेयर आत्मनिर्भरता का सपना नहीं देख रहा, बल्कि उसे अभूतपूर्व स्तर पर लागू भी कर रहा है।" उनके अनुसार, सेमिकॉन 2.0 और अगली पीढ़ी की विनिर्माण नीतियां भारत को सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम निर्माण से वैश्विक इकोसिस्टम नेतृत्व की ओर ले जाएंगी।

उन्होंने बताया कि 1.27 लाख करोड़ रुपए के प्रावधान वाले सेमिकॉन 2.0 कार्यक्रम के तहत चिप डिजाइन, मशीनरी, कच्चा माल, चिप निर्माण संयंत्र, एडवांस्ड पैकेजिंग (एटीएमपी/ओएसएटी), अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल मानव संसाधन विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में एक मजबूत और संपूर्ण तकनीकी मूल्य शृंखला का निर्माण करना है।

इस बीच, इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के अध्यक्ष पंकज मोहिंदरू ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत 'सप्त धारा' विकास दृष्टि और बड़े पैमाने पर एआई कौशलयुक्त कार्यबल तैयार करने की योजना भारत को वैश्विक मूल्य शृंलाओं में अग्रणी भूमिका दिलाने का खाका प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र अब केवल वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहता, बल्कि वह वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में विश्वसनीयता, मजबूती और नेतृत्व का नया मानक स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।



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